साथ Poetry (page 85)

दिल में ख़याल-ए-नर्गिस-ए-जानाना आ गया

अख़्तर शीरानी

क़िस्मत में दर्द है तो दवा ही न लाऊँगा

अख़तर शाहजहाँपुरी

जो ज़ेहन-ओ-दिल के ज़हरीले बहुत हैं

अख़तर शाहजहाँपुरी

हाथ जब मौसम के गीले हो गए हैं

अख़तर शाहजहाँपुरी

कभी ख़याल की सूरत कभी सबा की तरह

अख्तर सईदी

दुश्मन-ए-जाँ ही सही साथ तो इक उम्र का है

अख़्तर सईद ख़ान

तुम से छुट कर ज़िंदगी का नक़्श-ए-पा मिलता नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

दिल-ए-शोरीदा की वहशत नहीं देखी जाती

अख़्तर सईद ख़ान

तुम्हारे होने का शायद सुराग़ पाने लगे

अख़्तर रज़ा सलीमी

लम्स-ए-आख़िरी

अख़्तर पयामी

माइल-ए-लुत्फ़ है आमादा-ए-बे-दाद भी है

अख़तर मुस्लिमी

कहाँ जाएँ छोड़ के हम उसे कोई और उस के सिवा भी है

अख़तर मुस्लिमी

दरिया नज़र न आए न सहरा दिखाई दे

अख़तर मुस्लिमी

सू-ए-मक़्तल कोई दम साथ चले

अख्तर लख़नवी

देखो उस ने क़दम क़दम पर साथ दिया बेगाने का

अख्तर लख़नवी

अब भी आती है तिरी याद प इस कर्ब के साथ

अख़तर इमाम रिज़वी

दुनिया भी पेश आई बहुत बे-रुख़ी के साथ

अख़तर इमाम रिज़वी

दिल वो प्यासा है कि दरिया का तमाशा देखे

अख़तर इमाम रिज़वी

सुख़न दरमाँदा है

अख़्तर हुसैन जाफ़री

नज़्म

अख़्तर हुसैन जाफ़री

शाख़ों पे ज़ख़्म हैं कि शगूफ़े खिले हुए

अख़्तर होशियारपुरी

न जब कोई शरीक-ए-ज़ात होगा

अख़्तर होशियारपुरी

मेरे लहू में उस ने नया रंग भर दिया

अख़्तर होशियारपुरी

ख़्वाहिशें इतनी बढ़ीं इंसान आधा रह गया

अख़्तर होशियारपुरी

होंटों पे क़र्ज़-ए-हर्फ़-ए-वफ़ा उम्र भर रहा

अख़्तर होशियारपुरी

मुझ से मत पूछ मिरा हाल-ए-दरूँ रहने दे

अख़लाक़ बन्दवी

इधर चराग़ जल गए उधर चराग़ जल गए

अख़लाक़ बन्दवी

मुलाहिज़ा हो मिरी भी उड़ान पिंजरे में

अखिलेश तिवारी

निगह-ए-शौक़ से हुस्न-ए-गुल-ओ-गुलज़ार तो देख

अकबर हैदराबादी

दूर तक बस इक धुँदलका गर्द-ए-तन्हाई का था

अकबर हैदराबादी

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