कारण Poetry (page 13)

सबब थी फ़ितरत-ए-इंसाँ ख़राब मौसम का

फ़रियाद आज़र

इस तमाशे का सबब वर्ना कहाँ बाक़ी है

फ़रियाद आज़र

आप की तस्वीर थी अख़बार में

फ़ारूक़ नाज़की

अजीब रंग सा चेहरों पे बे-कसी का है

फ़ारूक़ नाज़की

ये ज़मीं ख़्वाब है आसमाँ ख़्वाब है

फ़रहत शहज़ाद

जब हर नज़र हो ख़ुद ही तजल्ली-नुमा-ए-ग़म

फ़रहत क़ादरी

अहल-ए-बदन को इश्क़ है बाहर की कोई चीज़

फ़रहत एहसास

ज़िंदगी चुपके से इक बात कहा करती है

फ़रह इक़बाल

जब तक मिरे होंटों पे तिरा नाम रहेगा

फ़ना बुलंदशहरी

है वज्ह कोई ख़ास मिरी आँख जो नम है

फ़ना बुलंदशहरी

नुसख़ा-ए-उल्फ़त मेरा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

निसार मैं तेरी गलियों के

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ऐ शाम मेहरबाँ हो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

यक-ब-यक शोरिश-ए-फ़ुग़ाँ की तरह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तिरी उमीद तिरा इंतिज़ार जब से है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वफ़ा-दारी ग़नीमत हो गई क्या

फ़हमी बदायूनी

बे-सबब हम से जुदाई न करो

फ़ाएज़ देहलवी

दुनिया सबब-ए-शोरिश-ए-ग़म पूछ रही है

एजाज़ सिद्दीक़ी

दुनिया सबब-ए-शोरिश-ए-ग़म पूछ रही है

एजाज़ सिद्दीक़ी

कोई सबब तो है ऐसा कि एक उम्र से हैं

एजाज़ गुल

बे-सबब जम'अ तो करता नहीं तीर ओ तरकश

एजाज़ गुल

पेचाक-ए-उम्र अपने सँवार आइने के साथ

एजाज़ गुल

इतना तिलिस्म याद के चक़माक़ में रहा

एजाज़ गुल

गली से अपनी उठाता है वो बहाने से

एजाज़ गुल

अक्स उभरा न था आईना-ए-दिल-दारी का

एजाज़ गुल

हम हक़ीक़त हैं तो तस्लीम न करने का सबब

एहसान दानिश

न सियो होंट न ख़्वाबों में सदा दो हम को

एहसान दानिश

अपनी रुस्वाई का एहसास तो अब कुछ भी नहीं

एहसान दानिश

अश्क पर ज़ोर कुछ चला ही नहीं

डॉक्टर आज़म

सब्र के दरिया में जब आ जाएगा

दिनेश ठाकुर

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