शाम Poetry (page 21)

होंटों पर महसूस हुई है आँखों से मादूम रही है

शाद आरफ़ी

तिरा वहशी कुछ आगे है जुनून-ए-फ़ित्ना-सामाँ से

सेहर इश्क़ाबादी

मैं अगर फ़िक्र के शह-पर से अलग हो जाऊँ

सीन शीन आलम

वक़्त ने इक नज़र जो डाली है

सीमान नवेद

अजीब शाम थी जब लौट कर मैं घर आया

सीमान नवेद

फिर आ गया ज़बाँ पे वही नाम क्या करें

सीमाब सुल्तानपुरी

ये किस ने शाख़-ए-गुल ला कर क़रीब-ए-आशियाँ रख दी

सीमाब अकबराबादी

शायद जगह नसीब हो उस गुल के हार में

सीमाब अकबराबादी

शाम-ए-फ़ुर्क़त इंतिहा-ए-गर्दिश-ए-अय्याम है

सीमाब अकबराबादी

रोज़-ए-फ़िराक़ हर तरफ़ इक इंतिशार था

सीमाब अकबराबादी

जहान-ए-रंग-ओ-बू में मुस्तक़िल तख़्लीक़-ए-मस्ती है

सीमाब अकबराबादी

ग़म मुझे हसरत मुझे वहशत मुझे सौदा मुझे

सीमाब अकबराबादी

छुपाता हूँ मगर छुपता नहीं दर्द-ए-निहाँ फिर भी

सीमाब अकबराबादी

बड़ी दिलचस्पियों से सुब्ह-ए-शाम-ए-ज़िंदगी होगी

सीमाब अकबराबादी

चाँद ख़ुद को देख कर शरमाएगा

सीमा शर्मा मेरठी

सुर्ख़ सुनहरी सब्ज़ और धानी होती है

सीमा नक़वी

डिकलाइन

सीमा ग़ज़ल

लज़्ज़त-ए-दर्द-ए-अलम ही से सुकूँ आ जाए है

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

महफ़िल-ए-दोस्त में गो सीना-फ़िगार आए हैं

सय्यद एहतिशाम हुसैन

दिल-ए-बर्बाद में फिर उस की तमन्ना क्यूँ है

सय्यद ज़िया अल्वी

अश्क पीते रहे हर जाम पे हँसते हँसते

सय्यद ज़िया अल्वी

सोख़्ता कश्ती का मलबा मैं मिरा दिल और शाम

सय्यद नसीर शाह

सफ़र-ब-ख़ैर प रख़्त-ए-सफ़र न ले जाना

सय्यद नसीर शाह

तन्हाई का इलाज ये महँगा बहुत पड़ा

सौरभ शेखर

सामान है इस दर्जा अम्बार से सर फोड़ो

सौरभ शेखर

ने ग़रज़ कुफ़्र से रखते हैं न इस्लाम से काम

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मस्त-ए-सहर ओ तौबा-कुनाँ शाम का हूँ मैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ले दीदा-ए-तर जिधर गए हम

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गुल फेंके है औरों की तरफ़ बल्कि समर भी

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बे-वज्ह नईं है आइना हर बार देखना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

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