शाम Poetry (page 29)

लगी है भीड़ बड़ा मय-कदे का नाम भी है

रविश सिद्दीक़ी

ख़ल्वती-ए-ख़याल को होश में कोई लाए क्यूँ

रविश सिद्दीक़ी

उम्र भर पेश-ए-नज़र माह-ए-तमाम आते रहे

रौनक़ रज़ा

जब कभी यादों का दरवाज़ा खुला आख़िर-ए-शब

रौनक़ दकनी

कोई ज़ख़्म खुला तो सहने लगे कोई टीस उठी लहराने लगे

रउफ़ रज़ा

जो भी कुछ अच्छा बुरा होना है जल्दी हो जाए

रउफ़ रज़ा

कितनी ठंडी थी हवा क़र्या-ए-बर्फ़ानी की

रासिख़ इरफ़ानी

ख़िज़ाँ की बात न ज़िक्र-ए-बहार करते हैं

रशक खलीली

रौशनी बन के अँधेरे पे असर हम ने किया

राशिद तराज़

जिस को देखो एहतिसाब-ए-ज़ीस्त से ग़ाफ़िल है आज

रशीद शाहजहाँपुरी

आँखों आँखों में मोहब्बत का पयाम आ ही गया

रशीद शाहजहाँपुरी

प्यारा सा ख़्वाब नींद को छू कर गुज़र गया

राशिद जमाल फ़ारूक़ी

शाम की उड़ान

राशिद अनवर राशिद

वो और लोग थे जो रास्ते बदलते रहे

राशिद अनवर राशिद

तड़प उठता हूँ यादों से लिपट कर शाम होते ही

राशिद अनवर राशिद

नज़र में धूल फ़ज़ा में ग़ुबार चारों तरफ़

राशिद अनवर राशिद

बहुत उदास है माह-ए-तमाम किस के लिए

राशिद अनवर राशिद

आँख की झील में कोहराम से आए हुए हैं

राशिद अमीन

तुम अपनी आँखों को बंद कर लो

राशिद आज़र

मिरे घर के लोग जो घर मुझी को सुपुर्द कर के चले गए

रशीद रामपुरी

सहरा सहरा बात चली है नगरी नगरी चर्चा है

रशीद क़ैसरानी

सवाद-ए-शाम पे सूरज उतरने वाला है

रशीद निसार

सरहद-ए-जिस्म पे हैरान खड़ा था मैं भी

रशीद निसार

नहीं था ज़ख़्म तो आँसू कोई सजा लेता

रशीद निसार

दिल हमारा जानिब-ए-ज़ुल्फ़-ए-सियह-फ़ाम आएगा

रशीद लखनवी

बाग़ में जुगनू चमकते हैं जो प्यारे रात को

रशीद लखनवी

आप दिल जा कर जो ज़ख़्मी हो तो मिज़्गाँ क्या करे

रशीद लखनवी

आँसू की तरह पोंछ के फेंका गया हूँ मैं

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

किसे है लौह-ए-वक़्त पर दवाम सोचते रहे

रशीद कामिल

तन्हाइयों के दर्द से रिसता हुआ लहू

रशीद अफ़रोज़

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