वफ़ा Poetry (page 15)

किसी के वादा-ए-फ़र्दा में गुम है इंतिज़ार अब भी

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

लोग क्यूँ ढूँड रहे हैं मुझे पत्थर ले कर

शमीम तारिक़

ख़मोश किस लिए बैठे हो चश्म-ए-तर क्यूँ हो

शमीम करहानी

ज़रा भी जिस की वफ़ा का यक़ीन आया है

शमीम जयपुरी

ये दौर-ए-अहल-ए-हवस है करम से काम न ले

शमीम जयपुरी

तिरे अहल-ए-दर्द के रोज़-ओ-शब इसी कश्मकश में गुज़र गए

शमीम जयपुरी

हर शय तुझी को सामने लाए तो क्या करूँ

शमीम जयपुरी

बे-गुनाही का हर एहसास मिटा दे कोई

शमीम जयपुरी

बा-वफ़ाई की अदा पाने लगा हूँ तुझ में

शमीम जयपुरी

ज़ेर-ए-ज़मीं दबी हुई ख़ाक को आसाँ कहो

शमीम हनफ़ी

तीरगी चाँद को इनआम-ए-वफ़ा देती है

शमीम हनफ़ी

अब क़ैस है कोई न कोई आबला-पा है

शमीम हनफ़ी

आँखें ग़म-ए-फ़िराक़ से हैं तर इधर-उधर

शमीम फ़तेहपुरी

तन्हाई का ग़म ढोएँ और रो रो जी हलकान करें

शाकिर ख़लीक़

कब शौक़ मिरा जज़्बे से बाहर न हुआ था

शाकिर ख़लीक़

बे-पर्दा उस का चेहरा-ए-पुर-नूर तो हुआ

शाकिर कलकत्तवी

उस से गिले शिकायतें शिकवे भी छोड़ दो

शकील शम्सी

मुझ को तिरे सुलूक से कोई गिला न था

शकील शम्सी

जाँ के ज़ियाँ को ग़म की तलाफ़ी समझ लिया

शकील जाज़िब

न कोई ख़्वाब कमाया न आँख ख़ाली हुई

शकील जमाली

किसी का साथ मियाँ जी सदा नहीं रहा है

शकील जमाली

आज उस बज़्म में यूँ दाद-ए-वफ़ा दी जाए

शकील ग्वालिआरी

ये अदा-ए-बे-नियाज़ी तुझे बेवफ़ा मुबारक

शकील बदायुनी

दुश्मनों को सितम का ख़ौफ़ नहीं

शकील बदायुनी

ज़लज़ला

शकील बदायुनी

नुमाइश-ए-अलीगढ़

शकील बदायुनी

मुझे भूल जा

शकील बदायुनी

अलीगढ़ छोड़ने के ब'अद

शकील बदायुनी

ये क्या सितम-ज़रीफ़ी-ए-फ़ितरत है आज-कल

शकील बदायुनी

तुम ने ये क्या सितम किया ज़ब्त से काम ले लिया

शकील बदायुनी

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