वफ़ा Poetry (page 16)

तस्वीर बनाता हूँ तिरी ख़ून-ए-जिगर से

शकील बदायुनी

सर भी है पा-ए-यार भी शौक़-ए-सिवा को क्या हुआ

शकील बदायुनी

रंग-ए-सनम-कदा जो ज़रा याद आ गया

शकील बदायुनी

रह वफ़ा में कोई साहिब-ए-जुनूँ न मिला

शकील बदायुनी

मिरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं

शकील बदायुनी

मौसम-ए-गुल साथ ले कर बर्क़ ओ दाम आ ही गया

शकील बदायुनी

लतीफ़ पर्दों से थे नुमायाँ मकीं के जल्वे मकाँ से पहले

शकील बदायुनी

लम्हा लम्हा बार है तेरे बग़ैर

शकील बदायुनी

जीने वाले क़ज़ा से डरते हैं

शकील बदायुनी

इहानत-ए-दिल-ए-सब्र-आज़मा नहीं करते

शकील बदायुनी

हज़ार क़ैद-ए-ख़िज़ाँ से छुट कर बहार का आसरा करेंगे

शकील बदायुनी

हज़ार क़ैद-ए-जवाँ से छुट कर बहार का आसरा करेंगे

शकील बदायुनी

गुलशन हो निगाहों में तो जन्नत न समझना

शकील बदायुनी

ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए-आम तक न पहुँचे

शकील बदायुनी

ग़म से कहाँ ऐ इश्क़ मफ़र है

शकील बदायुनी

इक इक क़दम फ़रेब-ए-तमन्ना से बच के चल

शकील बदायुनी

दिल में किसी ख़लिश का गुज़र चाहता हूँ मैं

शकील बदायुनी

बेगाना हो के बज़्म-ए-जहाँ देखता हूँ मैं

शकील बदायुनी

बहार आई किसी का सामना करने का वक़्त आया

शकील बदायुनी

बदले बदले मिरे ग़म-ख़्वार नज़र आते हैं

शकील बदायुनी

आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है ज़िंदगी की है शाम आख़िरी आख़िरी

शकील बदायुनी

कहीं से चाँद कहीं से क़ुतुब-नुमा निकला

शकील आज़मी

रौशन हैं दिल के दाग़ न आँखों के शब-चराग़

शकेब जलाली

मुझ से मिलने शब-ए-ग़म और तो कौन आएगा

शकेब जलाली

इस ख़ाक-दाँ में अब तक बाक़ी हैं कुछ शरर से

शकेब जलाली

तू न आया तिरी यादों की हवा तो आई

शकेब बनारसी

साथ ग़ुर्बत में कोई ग़ैर न अपना निकला

शकेब बनारसी

लगा लिया था गले उस ने बा-वफ़ा कह कर

शकेब अयाज़

लिखे हुए अल्फ़ाज़ में तासीर नहीं है

शाइस्ता मुफ़्ती

ख़ाक से उठना ख़ाक में सोना ख़ाक को बंदा भूल गया

शाइस्ता मुफ़्ती

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