वफ़ा Poetry (page 18)

शहर-ए-निगाराँ में फिरते हैं हम आवारा रात ढले

शाहिद इश्क़ी

नक़्द-ए-दिल-ओ-जाँ उस की ख़ातिर रहन-ए-जाम करो

शाहिद इश्क़ी

मौत का क्यूँ कर ए'तिबार आए

शाहिद इश्क़ी

महताब है न अक्स-ए-रुख़-ए-यार अब कोई

शाहिद इश्क़ी

हर परी-वश का ए'तिबार करो

शाहिद इश्क़ी

जो तुम से मिला होगा जो तुम ने दिया होगा

शाहिद ग़ाज़ी

साज़-ए-दिल साज़-ए-जुनूँ साज़-ए-वफ़ा कुछ भी नहीं

शाहिद भोपाली

बाज़ार

शाहिद अख़्तर

महका है गुल-ए-ख़ून-ए-वफ़ा जानिए क्या हो

शाहिद अख़्तर

ये भी शायद तिरा ए'जाज़-ए-नज़र है ऐ दोस्त

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

सुब्ह-ए-वफ़ा से हिज्र का लम्हा जुदा करो

शाहीन अब्बास

पराए शहर में ख़ुशबू तलाश लेते हैं

शाहबाज़ रिज़्वी

चलो यूँ ही सही हम बेवफ़ा हैं

शहबाज़ नदीम ज़ियाई

दिल पर वफ़ा का बोझ उठाते रहे हैं हम

शहाब जाफ़री

निकहत-ए-गुल हैं या सबा हैं हम

शाह नसीर

न दिखाइयो हिज्र का दर्द-ओ-अलम तुझे देता हूँ चर्ख़-ए-ख़ुदा की क़सम

शाह नसीर

कभू न उस रुख़-ए-रौशन पे छाइयाँ देखीं

शाह नसीर

बे-मेहर-ओ-वफ़ा है वो दिल-आराम हमारा

शाह नसीर

सोज़-ए-दरूँ हमारा ज़ाहिर न हो किसी पर

शाग़िल क़ादरी

रेग-ए-रवाँ पे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा न देखना

शफ़क़त तनवीर मिर्ज़ा

हम ख़राबे में बसर कर गए ख़ामोशी से

शफ़क़त तनवीर मिर्ज़ा

हमारे पास था जो कुछ लुटा के बैठ रहे

शफ़क़त तनवीर मिर्ज़ा

कभी तो उन को हमारा ख़याल आएगा

शफ़क़त काज़मी

हमारे हाल पे किस दिन जफ़ा नहीं करते

शफ़क़त काज़मी

उम्र भर डोलती यादों की ज़िया से खेले

शफ़क़त बटालवी

शब-ए-फ़िराक़ का मारा हूँ दिल-गिरफ़्ता हूँ

शफ़ीक़ देहलवी

अजीब रुत थी बरसती हुई घटाएँ थीं

शफ़ी अक़ील

मुझे किसी पे मोहब्बत का कुछ गुमाँ सा है

शफ़क़ सुपुरी

क़यामत से नहीं कम इंतिज़ार-ए-वस्ल की लज़्ज़त

शफ़क़ इमादपुरी

ज़बाँ ख़मोश रहे तर्क-ए-मुद्दआ न करे

शायर फतहपुरी

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