वफ़ा Poetry (page 20)

महफ़िल-ए-इश्क़ में जब नाम तिरा लेते हैं

सीमाब अकबराबादी

ख़त्म इस तरह नज़ा-ए-हक़-ओ-बातिल हो जाए

सीमाब अकबराबादी

जो इंसाँ बारयाब-ए-पर्दा-ए-असरार हो जाए

सीमाब अकबराबादी

ब-क़ैद-ए-वक़्त ये मुज़्दा सुना रहा है कोई

सीमाब अकबराबादी

ब-क़द्र-ए-शौक़ इक़रार-ए-वफ़ा क्या

सीमाब अकबराबादी

अज़्म-ए-फ़रियाद! उन्हें ऐ दिल-ए-नाशाद नहीं

सीमाब अकबराबादी

अफ़सोस गुज़र गई जवानी

सीमाब अकबराबादी

अब क्या बताऊँ मैं तिरे मिलने से क्या मिला

सीमाब अकबराबादी

अब ऐ बे-दर्द क्या इस के लिए इरशाद होता है

सीमाब अकबराबादी

यूँ बातें तो बहुत सारी करोगे

सय्यदा अरशिया हक़

शम्अ' रौशन कोई कर दे मिरे ग़म-ख़ाने में

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

बर्बादियों का अपनी गिला क्या करेंगे हम

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

रस्म ही शहर-ए-तमन्ना से वफ़ा की उठ जाए

सय्यद एहतिशाम हुसैन

महफ़िल-ए-दोस्त में गो सीना-फ़िगार आए हैं

सय्यद एहतिशाम हुसैन

मआल-ए-इशक़-ओ-मुहब्बत से आश्ना तो नहीं

सय्यद आशूर काज़मी

गर तुझ में है वफ़ा तो जफ़ाकार कौन है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

नसीम है तिरे कूचे में और सबा भी है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जब नज़र उस की आन पड़ती है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गर तुझ में है वफ़ा तो जफ़ाकार कौन है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गर कीजिए इंसाफ़ तो की ज़ोर वफ़ा मैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दिल मत टपक नज़र से कि पाया न जाएगा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

उन को है ए'तिदाल मुझे इंतिहा पसंद

सत्यपाल जाँबाज़

गाहे गाहे वो चले आते हैं दीवाने के पास

सत्यपाल जाँबाज़

सब घरों में तो चराग़ों का उजाला होगा

सत्य नन्द जावा

जो दूर से हमें अक्सर ख़ुदा सा लगता है

सत्य नन्द जावा

दर्द-ए-दिल के लिए कुछ ऐसी दवा ली हम ने

सत्य नन्द जावा

आरज़ूओं के शगूफ़ों को जला कर देखो

सत्य नन्द जावा

इक राज़-ए-दिलरुबा को बयाँ होना है अभी

सत्तार सय्यद

बातों से सितमगर मुझे बहलाता रहा वो

सरवर मजाज़

रौशनी से तीरगी ताबीर कर दी जाएगी

सरवर अरमान

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