वफ़ा Poetry (page 19)

मज़ा शबाब का जब है कि बा-ख़ुदा भी रहे

शायर फतहपुरी

इतने चुप क्यूँ हो माजरा क्या है

शायर फतहपुरी

सर-ए-बज़्म मेरी नज़र से जब वो निगाह-ए-होश-रुबा मिली

शादाँ इंदौरी

जफ़ा-शिआ'र भी हो कोई मेहरबाँ भी रहे

शाद बिलगवी

छुप-छुप के तू 'शाद' उस से मुलाक़ात करे है

शाद बिलगवी

अक़्लीम-ए-दिल पे इश्क़ की फ़रमाँ-रवाइयाँ

शाद बिलगवी

सियाहकार सियह-रू ख़ता-शिआर आया

शाद अज़ीमाबादी

ऐ बुत जफ़ा से अपनी लिया कर वफ़ा का काम

शाद अज़ीमाबादी

आईन-ए-वफ़ा इतना भी सादा नहीं होता

शबनम शकील

मेरे प्यार का क़िस्सा तो हर बस्ती में मशहूर है चाँद

शबनम रूमानी

कीजिए और सवालात न ज़ाती मुझ से

शबनम रूमानी

नज़्म

शबनम अशाई

नज़्म

शबनम अशाई

नज़्म

शबनम अशाई

शब-ए-विसाल थी रौशन फ़ज़ा में बैठा था

शबाब ललित

सहरा की बे-आब ज़मीं पर एक चमन तय्यार किया

शायर लखनवी

तुम से उल्फ़त के तक़ाज़े न निबाहे जाते

शानुल हक़ हक़्क़ी

समझ में ख़ाक ये जादूगरी नहीं आती

शानुल हक़ हक़्क़ी

नज़र चुरा गए इज़हार-ए-मुद्दआ से मिरे

शानुल हक़ हक़्क़ी

ऐ दिल अब और कोई क़िस्सा-ए-दुनिया न सुना

शानुल हक़ हक़्क़ी

अभी तो मौसम-ए-ना-ख़ुश-गवार आएगा

शाद आरफ़ी

तेरी जफ़ा वफ़ा सही मेरी वफ़ा जफ़ा सही

सेहर इश्क़ाबादी

जिस से वफ़ा की थी उम्मीद उस ने अदा किया ये हक़

सेहर इश्क़ाबादी

यही बस एक दुआ माँगना नहीं आता

सीन शीन आलम

टलने के नहीं अहल-ए-वफ़ा ख़ौफ़-ए-ज़ियाँ से

सीमाब ज़फ़र

मैं तोड़ूँ अहद-ओ-पैमान-ए-वफ़ा ये हो नहीं सकता

सीमाब बटालवी

रंग भरते हैं वफ़ा का जो तसव्वुर में तिरे

सीमाब अकबराबादी

नशात-ए-हुस्न हो जोश-ए-वफ़ा हो या ग़म-ए-इश्क़

सीमाब अकबराबादी

तक़दीर में इज़ाफ़ा-ए-सोज़-ए-वफ़ा हुआ

सीमाब अकबराबादी

मुझे फ़िक्र-ओ-सर-ए-वफ़ा है हनूज़

सीमाब अकबराबादी

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