वफ़ा Poetry (page 64)

होली

अली जव्वाद ज़ैदी

राह-ए-उल्फ़त में मिले ऐसे भी दीवाने मुझे

अली जव्वाद ज़ैदी

है ख़मोश आँसुओं में भी नशात-ए-कामरानी

अली जव्वाद ज़ैदी

दीन ओ दिल पहली ही मंज़िल में यहाँ काम आए

अली जव्वाद ज़ैदी

दबी आवाज़ में करती थी कल शिकवे ज़मीं मुझ से

अली जव्वाद ज़ैदी

ज़िंदगी क्या है जो दिल हो तश्ना-ए-ज़ौक़-ए-वफ़ा

अली अख़्तर अख़्तर

सफ़ीर-ए-लैला-4

अली अकबर नातिक़

मैं नक़्श-हा-ए-ख़ून-ए-वफ़ा छोड़ जाऊँगा

अलीम उस्मानी

अब जाम निगाहों के नशा क्यूँ नहीं देते

अलीम उस्मानी

ये और बात कि इक़रार कर सकें न कभी

अलीम अख़्तर

मोहब्बत क्या मोहब्बत का सिला क्या

अलीम अख़्तर

किसी के वादा-ए-फ़र्दा पर ए'तिबार तो है

अलीम अख़्तर

दर्द बढ़ कर दवा न हो जाए

अलीम अख़्तर

सिवाए-दर-ब-दरी उस को ख़ाक मिलता है

आलमताब तिश्ना

मिरी दस्तरस में है गर क़लम मुझे हुस्न-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल दे

आलमताब तिश्ना

किस किस से दोस्ती हुई ये ध्यान में नहीं

आलमताब तिश्ना

उर्दू

आलम मुज़फ्फ़र नगरी

यादें

अख़्तर-उल-ईमान

मुकाफ़ात

अख़्तर-उल-ईमान

बिंत-ए-लम्हात

अख़्तर-उल-ईमान

आख़िरी मुलाक़ात

अख़्तर-उल-ईमान

फिर वही शब के सराबों का चलन!

अख़्तर ज़ियाई

अहद-ए-वफ़ा का क़र्ज़ अदा कर दिया गया

अख़्तर ज़ियाई

उस के नज़दीक ग़म-ए-तर्क-ए-वफ़ा कुछ भी नहीं

अख्तर शुमार

काम आ सकीं न अपनी वफ़ाएँ तो क्या करें

अख़्तर शीरानी

इन वफ़ादारी के वादों को इलाही क्या हुआ

अख़्तर शीरानी

आँसू

अख़्तर शीरानी

मोहब्बत की दुनिया में मशहूर कर दूँ

अख़्तर शीरानी

काम आ सकीं न अपनी वफ़ाएँ तो क्या करें

अख़्तर शीरानी

आश्ना हो कर तग़ाफ़ुल आश्ना क्यूँ हो गए

अख़्तर शीरानी

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