वफ़ा Poetry (page 70)

मक़ाम-ए-शौक़ से आगे भी इक रस्ता निकलता है

आफ़ताब हुसैन

मैं सोचता हूँ अगर इस तरफ़ वो आ जाता

आफ़ताब हुसैन

मेरे लिए साहिल का नज़ारा भी बहुत है

अफ़सर माहपुरी

न हो या रब ऐसी तबीअत किसी की

अफ़सर इलाहाबादी

कुछ भी नहीं जो याद-ए-बुतान-ए-हसीं नहीं

अफ़सर इलाहाबादी

मौज-दर-मौज हवाओं से बचा लाऊँगा

अफ़रोज़ आलम

हम अहल-ए-नज़ारा शाम-ओ-सहर आँखों को फ़िदया करते हैं

अफ़ीफ़ सिराज

अर्सा-ए-माह-ओ-साल से गुज़रे

आदिल फ़रीदी

शामिल था ये सितम भी किसी के निसाब में

अदीम हाशमी

किसी झूटी वफ़ा से दिल को बहलाना नहीं आता

अदीम हाशमी

किस हवाले से मुझे किस का पता याद आया

अदीम हाशमी

इक खिलौना टूट जाएगा नया मिल जाएगा

अदीम हाशमी

रह-ए-हयात में जो लोग जावेदाँ निकले

अदील ज़ैदी

बाँध कर अहद-ए-वफ़ा कोई गया है मुझ से

अदीब सहारनपुरी

नग़्मा-ए-इश्क़-ए-बुताँ और ज़रा आहिस्ता

अदीब सहारनपुरी

ज़बाँ को हुक्म निगाह-ए-करम को पहचाने

अदा जाफ़री

वो लम्हा कि ख़ामोशी-ए-शब नग़्मा-सरा थी

अदा जाफ़री

वही ना-सबूरी-ए-आरज़ू वही नक़्श-ए-पा वही जादा है

अदा जाफ़री

न बाम-ओ-दश्त न दरिया न कोहसार मिले

अदा जाफ़री

कहते हैं कि अब हम से ख़ता-कार बहुत हैं

अदा जाफ़री

गुलों को छू के शमीम-ए-दुआ नहीं आई

अदा जाफ़री

घर का रस्ता भी मिला था शायद

अदा जाफ़री

बेगानगी-ए-तर्ज़-ए-सितम भी बहाना-साज़

अदा जाफ़री

तज्दीद-ए-रिवायात-ए-कुहन करते रहेंगे

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

हर एहतिमाम है दो दिन की ज़िंदगी के लिए

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

रह-ए-वफ़ा में उन्हीं की ख़ुशी की बात करो

अबु मोहम्मद वासिल

मसरूर हो रहे हैं ग़म-ए-आशिक़ी से हम

अबु मोहम्मद वासिल

रह-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा भी कूचा-ओ-बाज़ार हो जैसे

अबु मोहम्मद सहर

ये तो नहीं कि बादिया-पैमा न आएगा

अबु मोहम्मद सहर

तीर-अंदाजों को अंदाज़ा नहीं

अबसार अब्दुल अली

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