याद Poetry (page 37)

लफ़्ज़ों को सजा कर जो कहानी लिखना

सदफ़ जाफ़री

सब सितम याद हैं सारी हमदर्दियाँ याद हैं

साबिर ज़फ़र

नज़र आते नहीं हैं बहर में हम

साबिर ज़फ़र

महसूस लम्स जिस का सर-ए-रह-गुज़र किया

साबिर ज़फ़र

किसी तौर हो न पिन्हाँ तिरा रंग-ए-रू-सियाही

साबिर ज़फ़र

काम इतनी ही फ़क़त राहगुज़र आएगी

साबिर ज़फ़र

दिन को मिस्मार हुए रात को तामीर हुए

साबिर ज़फ़र

पहला पत्थर याद हमेशा रहता है

साबिर वसीम

ये उम्र भर का सफ़र है इसी सहारे पर

साबिर वसीम

राह में शहर-ए-तरब याद आया

साबिर वसीम

पहला पत्थर याद हमेशा रहता है

साबिर वसीम

इक आग देखता था और जल रहा था मैं

साबिर वसीम

हो कोई मसअला अपना दुआ पर छोड़ देते हैं

साबिर रज़ा

फिर लाई है बरसात तिरी याद का मौसम

साबिर दत्त

तन्हाई

साबिर दत्त

और मोड़ ने कहा

साबिर दत्त

हैरान हूँ दो आँखों से क्या देख रहा हूँ

साबिर दत्त

इक तिरी याद से यादों के ख़ज़ाने निकले

सबीहा सबा, पाकिस्तान

दिल में आ जा दिलबर साईं

सबीहा सबा, पाकिस्तान

मैं दरिया हूँ मगर दोनों तरफ़ साहिल है तन्हाई

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

किस को बताते किस से छुपाते सुराग़-ए-दिल

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

जहाँ में जिस की शोहरत कू-ब-कू है

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

आँखों में वो आएँ तो हँसाते हैं मुझे ख़्वाब

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

और किस तरह उसे कोई क़बा दी जाए

सबा जायसी

कसरत-ए-जल्वा को आईना-ए-वहदत समझो

सबा अकबराबादी

हुस्न जो रंग ख़िज़ाँ में है वो पहचान गया

सबा अकबराबादी

आँखों से वो कभी मिरी ओझल नहीं रहा

सअादत सईद

आँखों से वो कभी मिरी ओझल नहीं रहा

सअादत सईद

अब आप आ गए हैं तो आता नहीं है याद

रूही कंजाही

ये सिलसिला-ए-शाम-ओ-सहर यूँही नहीं है

रूही कंजाही

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