याद Poetry (page 73)

आँखों में तिरी शक्ल है दिल में है तिरी याद

अज़ीज़ हैदराबादी

ये फ़ज़ा-ए-साज़-ओ-मुज़रिब ये हुजूम-ताज-ए-दाराँ

अज़ीज़ हामिद मदनी

नक़्शे उसी के दिल में हैं अब तक खिंचे हुए

अज़ीज़ हामिद मदनी

हरम का आईना बरसों से धुँदला भी है हैराँ भी

अज़ीज़ हामिद मदनी

एक-आध हरीफ़-ए-ग़म-ए-दुनिया भी नहीं था

अज़ीज़ हामिद मदनी

एक ही शहर में रहते बस्ते काले कोसों दूर रहा

अज़ीज़ हामिद मदनी

न याद आया न भूला न सानेहा मुझ को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

रात इक शख़्स बहुत याद आया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

बहुत दिनों से इधर उस को याद भी न किया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

वक़्त जब राह की दीवार हुआ

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

ख़ाक ओ ख़ला का हिसार और मैं

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

जुनूँ-नवाज़ सफ़र का ख़याल क्यूँ आया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

सुकून-ए-दिल गया नज़रों से सब क़तारे गए

अज़ीम हैदर सय्यद

जी रहा हूँ मैं उदासी भरी तस्वीर के साथ

अज़हर नैयर

हैरान हूँ कि आज ये क्या हादिसा हुआ

अज़हर नैयर

तुम्हारी याद के दीपक भी अब जलाना क्या

अज़हर इक़बाल

इस रास्ते में जब कोई साया न पाएगा

अज़हर इनायती

इस रास्ते में जब कोई साया न पाएगा

अज़हर इनायती

घर का रस्ता जो भूल जाता हूँ

अज़हर इनायती

फ़िक्र में हैं हमें बुझाने की

अज़हर इनायती

फ़न उड़ानों का जब ईजाद किया था मैं ने

अज़हर इनायती

अभी बिछड़ा है वो कुछ रोज़ तो याद आएगा

अज़हर इनायती

गुज़रे हुए लम्हात को अब ढूँड रहा हूँ

अज़हर हाश्मी

आज निकले याद की ज़म्बील से

अज़हर अदीब

कल परदेस में याद आएगी ध्यान में रख

अज़हर अदीब

कुछ नक़्श तिरी याद के बाक़ी हैं अभी तक

अज़ीम मुर्तज़ा

ये और बात है कि मदावा-ए-ग़म न था

अज़ीम मुर्तज़ा

नीम-शब आतिश-ए-फ़रियाद-ए-असीराँ रौशन

अज़ीम मुर्तज़ा

महरूमी के दुख और तन्हाई के रंज उठाए

अज़ीम मुर्तज़ा

कुछ नक़्श तिरी याद के बाक़ी हैं अभी तक

अज़ीम मुर्तज़ा

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