याद Poetry (page 71)

ख़ामुशी

बाक़र मेहदी

गोडो

बाक़र मेहदी

अलविदा'अ

बाक़र मेहदी

ख़बर सुनेगा मिरी मौत की तो ख़ुश होगा

बाक़र मेहदी

हज़ार चाहा लगाएँ किसी से दिल लेकिन

बाक़र मेहदी

तू ख़ुश है अपनी दुनिया में

बक़ा बलूच

मैं किनारे पे खड़ा हूँ तो कोई बात नहीं

बक़ा बलूच

क्या पूछते हो मैं कैसा हूँ

बक़ा बलूच

अब नहीं दर्द छुपाने का क़रीना मुझ में

बक़ा बलूच

किरदार ही से ज़ीनत-ए-अफ़्लाक हो गए

बनो ताहिरा सईद

ये किस की याद का दिल पर रफ़ू था

बकुल देव

समाअ'त के लिए इक इम्तिहाँ है

बकुल देव

कौन कहता है ठहर जाना है

बकुल देव

बारिशों में अब के याद आए बहुत

बकुल देव

कभी आँखों पे कभी सर पे बिठाए रखना

बख़्श लाइलपूरी

ज़ाहिदा काबे को जाता है तो कर याद-ए-ख़ुदा

बहराम जी

कुफ़्र एक रंग-ए-क़ुदरत-ए-बे-इंतिहा में है

बहराम जी

ग़मगीं नहीं हूँ दहर में तो शाद भी नहीं

बहराम जी

'ज़फ़र' आदमी उस को न जानिएगा वो हो कैसा ही साहब-ए-फ़हम-ओ-ज़का

ज़फ़र

तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें

ज़फ़र

दिल को दिल से राह है तो जिस तरह से हम तुझे

ज़फ़र

नहीं इश्क़ में इस का तो रंज हमें कि क़रार ओ शकेब ज़रा न रहा

ज़फ़र

मोहब्बत चाहिए बाहम हमें भी हो तुम्हें भी हो

ज़फ़र

ख़्वाह कर इंसाफ़ ज़ालिम ख़्वाह कर बेदाद तू

ज़फ़र

है दिल को जो याद आई फ़लक-ए-पीर किसी की

ज़फ़र

इक़रार किसी दिन है तो इंकार किसी दिन

बद्र वास्ती

चराग़ों में अँधेरा है अँधेरे में उजाले हैं

बद्र वास्ती

जो झुक के मिलते थे जलसों में मेहरबाँ की तरह

बदनाम नज़र

हयात ढूँढ रहा हूँ क़ज़ा की राहों में

बदनाम नज़र

बाग़-ए-दिल में कोई ग़ुंचा न खिला तेरे बा'द

बदनाम नज़र

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