याद Poetry (page 72)

फिर किसी शख़्स की याद आई है

बीएस जैन जौहर

घटा सावन की उमडी आ रही है

बीएस जैन जौहर

घटा सावन की उमडी आ रही है

बीएस जैन जौहर

हवा के लब पे नए इंतिसाब से कुछ हैं

अज़रा वहीद

सिमट गई तो शबनम फूल सितारा थी

अज़रा परवीन

ये बोसे

अज़रा अब्बास

सेल्फ-पोर्ट्रेट

अज़रा अब्बास

नहीं

अज़रा अब्बास

आख़िरी रूसूमात के दौरान

अज़रा अब्बास

शाम आई तो कोई ख़ुश-बदनी याद आई

अज़्म बहज़ाद

मुझे कल अचानक ख़याल आ गया आसमाँ खो न जाए

अज़्म बहज़ाद

तू आ गया है तो अब याद भी नहीं मुझ को

अज़लान शाह

ज़रा सी देर में कश्कोल भरने वाला था

अज़लान शाह

यूँही कटे न रहगुज़र-ए-मुख़्तसर कहीं

अज़ीज़ तमन्नाई

कंफ़ेशन

अज़ीज़ क़ैसी

आह-ए-बे-असर निकली नाला ना-रसा निकला

अज़ीज़ क़ैसी

सर-ए-सहरा-ए-जाँ हम चाक-दामानी भी करते हैं

अज़ीज़ नबील

मोजज़े का दर खुला और इक असा रौशन हुआ

अज़ीज़ नबील

मैं नींद के ऐवान में हैरान था कल शब

अज़ीज़ नबील

तुम ने छेड़ा तो कुछ खुले हम भी

अज़ीज़ लखनवी

हाए क्या चीज़ थी जवानी भी

अज़ीज़ लखनवी

'मीर'

अज़ीज़ लखनवी

बचपने की याद

अज़ीज़ लखनवी

कुछ हिसाब ऐ सितम ईजाद तो कर

अज़ीज़ लखनवी

हिज्र की रात याद आती है

अज़ीज़ लखनवी

दिल हमारा है कि हम माइल-ए-फ़रियाद नहीं

अज़ीज़ लखनवी

चारागर चुप हैं क्यूँ इलाज करें

अज़ीज़ लखनवी

भड़क उट्ठेंगे शो'ले एक दिन दुनिया की महफ़िल में

अज़ीज़ लखनवी

नाले हैं न आहें हैं न रोना न तड़पना

अज़ीज़ हैदराबादी

गिन रहा हूँ हर्फ़ उन के अहद के

अज़ीज़ हैदराबादी

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