याद Poetry (page 84)

है याद मुझे नुक्ता-ए-सलमान-ए-ख़ुश-आहंग

अल्लामा इक़बाल

सदाओं के जंगल में वो ख़ामुशी है

अलीमुल्लाह हाली

राह में हक़ के अज़ीज़ाँ आप को क़ुर्बां करो

अलीमुल्लाह

दिलबर को दिलबरी सूँ मना यार कर रखूँ

अलीमुल्लाह

एक रात एक सुब्ह

अली ज़हीर लखनवी

पूरी हुई जो हिज्र की मीआद आवेगा

अली यासिर

सवाद-ए-शौक़-ओ-तलब ग़म का बाब ऐसा था

अली वजदान

ऐ नीश-ए-इश्क़ तेरे ख़रीदार क्या हुए

अली वजदान

आतिश-ए-इश्क़ में जलता रहा बुझता रहा दिल

अली वजदान

ज़ुल्म की कुछ मीआ'द नहीं है

अली सरदार जाफ़री

वतन से दूर यारान-ए-वतन की याद आती है

अली सरदार जाफ़री

ए'तिबार

अली साहिल

उसी के लिए

अली मोहम्मद फ़र्शी

एक तुम्हारी याद ने लाख दिए जलाए हैं

अली जव्वाद ज़ैदी

होली

अली जव्वाद ज़ैदी

भूलती हुई याद

अली जव्वाद ज़ैदी

मंज़िल-ए-दिल मिली कहाँ ख़त्म-ए-सफ़र के बाद भी

अली जव्वाद ज़ैदी

दीन ओ दिल पहली ही मंज़िल में यहाँ काम आए

अली जव्वाद ज़ैदी

ऐश ही ऐश है न सब ग़म है

अली जव्वाद ज़ैदी

आँखों में अश्क भर के मुझ से नज़र मिला के

अली जव्वाद ज़ैदी

सर्कस

अली इमरान

16 दिसम्बर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला

अली इमरान

किसी की आँख का तारा हुआ करते थे हम भी तो

अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री

चमन में वो फ़रामोशी का मौसम था मैं ख़ुद को भी

अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री

देखने में लगती थी भीगती सिमटती रात

अली अकबर अब्बास

शाम की पुरवाई

अलीना इतरत

तिरे चाँद जैसे रुख़ पर ये निशान-ए-दर्द क्यूँ हैं

अलीम उस्मानी

गर्दिश-ए-मय का इस पर न होगा असर मस्त आँखों का जादू जिसे याद है

अलीम उस्मानी

रूह अफ़्सुर्दा तबीअत मिरी ग़म-कोश हुई

अलीम मसरूर

इक जुनूँ कहिए उसे जो मिरे सर से निकला

अलीम मसरूर

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