ज़बां Poetry (page 28)

सैर में तेरी है बुलबुल बोस्ताँ बे-कार है

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

ख़ाल-ए-लब आफ़त-ए-जाँ था मुझे मालूम न था

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

ख़ाल-ए-लब आफ़त-ए-जाँ था मुझे मालूम न था

बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

कभी तो याद के गुल-दान में सजाऊँ उसे

बाक़र नक़वी

जो ज़माने का हम-ज़बाँ न रहा

बाक़र मेहदी

फ़रेब खा के भी शर्मिंदा-ए-सुकूँ न हुए

बाक़र मेहदी

नहीं है अश्क से ये ख़ून-ए-नाब आँखों में

बाक़र आगाह वेलोरी

सबा के हाथ पीले हो गए

बलराज कोमल

क़ातिल हुआ ख़मोश तो तलवार बोल उठी

बख़्श लाइलपूरी

कोई शय दिल को बहलाती नहीं है

बख़्श लाइलपूरी

ये क़िस्सा वो नहीं तुम जिस को क़िस्सा-ख़्वाँ से सुनो

ज़फ़र

हाल-ए-दिल क्यूँ कर करें अपना बयाँ अच्छी तरह

ज़फ़र

ये क़िस्सा वो नहीं तुम जिस को क़िस्सा-ख़्वाँ से सुनो

ज़फ़र

याँ ख़ाक का बिस्तर है गले में कफ़नी है

ज़फ़र

शाने की हर ज़बाँ से सुने कोई लाफ़-ए-ज़ुल्फ़

ज़फ़र

नहीं इश्क़ में इस का तो रंज हमें कि क़रार ओ शकेब ज़रा न रहा

ज़फ़र

गुम हुए जाते हैं धड़कन के निशाँ हम-नफ़सो

बद्र-ए-आलम ख़लिश

ख़बर शाकी है

बद्र वास्ती

कावाक

अज़ीज़ क़ैसी

आईने से

अज़ीज़ क़ैसी

तमीज़ अपने में ग़ैर में क्या तुम्हें जो अपना न कर सके हम

अज़ीज़ क़ैसी

मिरे दहन में अगर आप की ज़बाँ होती

अज़ीज़ लखनवी

जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए

अज़ीज़ लखनवी

जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए

अज़ीज़ लखनवी

नाले दम लेते नहीं या-रब फ़ुग़ाँ रुकती नहीं

अज़ीज़ हैदराबादी

वही दाग़-ए-लाला की बात है कि ब-नाम-ए-हुस्न उधर गई

अज़ीज़ हामिद मदनी

ताज़ा हवा बहार की दिल का मलाल ले गई

अज़ीज़ हामिद मदनी

ऐ शहर-ए-ख़िरद की ताज़ा हवा वहशत का कोई इनआम चले

अज़ीज़ हामिद मदनी

ज़रा मुश्किल से समझेंगे हमारे तर्जुमाँ हम को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हलाकत-ए-दिल-ए-नाशाद राएगाँ भी नहीं

अज़हर सईद

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