निकासी Poetry (page 13)

कोई याद ही रख़्त-ए-सफ़र ठहरे कोई राहगुज़र अनजानी हो

सलीम कौसर

कहीं तुम अपनी क़िस्मत का लिखा तब्दील कर लेते

सलीम कौसर

बस इक रस्ता है इक आवाज़ और एक साया है

सलीम कौसर

क्या लुत्फ़ हवाओं के सफ़र में नहीं रक्खा

सलीम फ़राज़

ख़ुद अपने अक्स को हैरत से देखता हूँ मैं

सलीम बेताब

आँख के कुंज में इक दश्त-ए-तमन्ना ले कर

सलीम बेताब

निकल गए हैं जो बादल बरसने वाले थे

सलीम अहमद

मैं सर छुपाऊँ कहाँ साया-ए-नज़र के बग़ैर

सलीम अहमद

लम्हा-ए-रफ़्ता का दिल में ज़ख़्म सा बन जाएगा

सलीम अहमद

किसी दश्त का लब-ए-ख़ुश्क हूँ जो न पाए मुज़्दा-ए-आब तक

सलीम अहमद

हर आँख का हासिल दूरी है

सलीम अहमद

एक ख़ुश्बू दिल-ओ-जाँ से आई

सलीम अहमद

आँखों में सितारे से चमकते रहे ता-देर

सलीम अहमद

ज़ुल्फ़-ए-शब-रंग जो बनाई है

सख़ी लख़नवी

चश्म-ए-मय-गूँ वहाँ शराब लज़ीज़

सख़ी लख़नवी

आरज़ूओं का हसीं पैकर तराश

सज्जाद सय्यद

शो'ला सा कोई बर्क़-ए-नज़र से नहीं उठता

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हमें चार सम्त की दौड़ में वही गर्द-ए-बाद-ए-सदा मिला

सज्जाद बाक़र रिज़वी

रूह को पहले ख़ाकसार किया

साजिद हमीद

चलो दुनिया से मिलना छोड़ देंगे

साजिद अमजद

सीने की आग आतिश-ए-महशर हो जिस तरह

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

नूर-ए-ईमाँ सुर्मा-ए-चश्म-ए-दिल-ओ-जाँ कीजिए

साहिर देहल्वी

हैं सात ज़मीं के तबक़ और सात हैं अफ़्लाक

साहिर देहल्वी

दिल है बहर-ए-बे-कराँ दिल की उमंग

साहिर देहल्वी

चार उंसुर से बना है जिस्म-ए-पाक

साहिर देहल्वी

जवाज़-ए-आब-ओ-ताब अब गुलाब के लिए नहीं

सहबा वहीद

एक इक से यही कहता हूँ बता मैं क्या हूँ

सहबा वहीद

इक शरार-ए-गिरफ़्ता-रंग हूँ मैं

सहर अंसारी

ख़ुद से निकलूँ तो अलग एक समाँ होता है

सग़ीर मलाल

होली

साग़र निज़ामी

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