आग Poetry (page 11)

मालूम है किसू को कि वो आज शोला-ख़ू

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बदन पर कुछ मिरे ज़ाहिर नहीं और दिल में सोज़िश है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इस दुख में हाए यार यगाने किधर गए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

गज़क की इस क़दर ऐ मस्त तुझ को क्या शिताबी है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मौत आती नहीं क़रीने की

शैख़ अब्दुल लतीफ़ तपिश

मौत आती नहीं क़रीने की

शैख़ अब्दुल लतीफ़ तपिश

देख इन आँखों से क्या जल-थल कर रक्खा है

शहज़ाद क़मर

जो कुछ भी मेरे पास थी दौलत निगल गई

शहज़ाद हुसैन साइल

रात के वक़्त कोई गीत सुनाती है हवा

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

शायद लोग इसी रौनक़ को गर्मी-ए-महफ़िल कहते हैं

शहज़ाद अहमद

कुछ तेरे सबब थी मिरे पहलू में हरारत

शहज़ाद अहमद

इक आग फिर भड़क उट्ठी है दीदा ओ दिल में

शहज़ाद अहमद

रूह की आग

शहज़ाद अहमद

एक दरख़्त

शहज़ाद अहमद

दिल-आराम

शहज़ाद अहमद

ये न हो वो भूलने वाला भुला देना पड़े

शहज़ाद अहमद

ये किस के आने के इम्काँ दिखाई देते हैं

शहज़ाद अहमद

रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया

शहज़ाद अहमद

फ़स्ल-ए-गुल ख़ाक हुई जब तो सदा दी तू ने

शहज़ाद अहमद

बे-ताबी-ए-ग़म-हा-ए-दरूँ कम नहीं होगी

शहज़ाद अहमद

अब निभानी ही पड़ेगी दोस्ती जैसी भी है

शहज़ाद अहमद

एक और साल गिरह

शहरयार

उम्मीद से कम चश्म-ए-ख़रीदार में आए

शहरयार

याद की बस्ती का यूँ तो हर मकाँ ख़ाली हुआ

शहराम सर्मदी

ताक़-ए-जाँ में तेरे हिज्र के रोग संभाल दिए

शहनाज़ नूर

पाप

शहनाज़ नबी

निज़ाम-ए-शम्सी

शहनाज़ नबी

उस की आँखों में मोहब्बत का गुमाँ तक नहीं आज

शहनवाज़ ज़ैदी

कभी क़लम कभी नेज़ों पे सर उछलते हैं

शाहजहाँ बानो याद

उसे जब भी देखा बहुत ध्यान से

शाहिदा तबस्सुम

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