आदमी Poetry (page 6)

ज़िंदगी के कटहरे में इक बे-ख़ता आदमी की तरह

सत्तार सय्यद

तलख़ीस के बदन में तफ़्सीर बोलती है

सरवर अरमान

इतने बहुत से रंग

सरवत हुसैन

पाते रहे ये फ़ैज़ तिरी बे-रुख़ी से हम

सरताज आलम आबिदी

जदीद-तरीन आदमी-नामा

सरफ़राज़ शाहिद

उसी का जल्वा-ए-ज़ेबा है चाँदनी क्या है

सरीर काबिरी

'ग़ालिब'-ए-दाना से पूछो इश्क़ में पड़ कर सलीम

सरदार सलीम

आज दीवाने का ज़ौक़-ए-दीद पूरा हो गया

सरदार सलीम

शैख़ चल तू शराब-ख़ाने में

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

मैं वो आतिश-ए-नफ़स हूँ आग अभी

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

इलाही ख़ैर हो वो आज क्यूँ कर तन के बैठे हैं

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

शायद मिट्टी मुझे फिर पुकारे

सारा शगुफ़्ता

परिंदा कमरे में रह गया

सारा शगुफ़्ता

पाँव मारा था पहाड़ों पे तो पानी निकला

साक़ी फ़ारुक़ी

जान प्यारी थी मगर जान से बे-ज़ारी थी

साक़ी फ़ारुक़ी

दर्द के इताब ले दोस्त उसे शुमार कर

साक़ी फ़ारुक़ी

करनी नहीं है दुनिया में इक दुश्मनी मुझे

संजीव आर्या

ख़ामोश धड़कनों की सदा की किसे ख़बर

संदीप कोल नादिम

तिलिस्म-ए-लफ़्ज़-ओ-मआ'नी को तार तार करें

समद अंसारी

आहटों से दिमाग़ जलता है

समद अंसारी

देखे जो मेरी नेकी को शक की निगाह से

सलमान अख़्तर

दाइम सराब इक मिरे अंदर है क्या करूँ

सलमान अख़्तर

आज शायद ज़िंदगी का फ़ल्सफ़ा समझा हूँ मैं

सलीम शुजाअ अंसारी

मुझ ना-तवाँ पे हश्र में वहम-ए-फुग़ाँ ग़लत

सालिक देहलवी

हम आदमी की तरह जी रहे हैं सदियों से

सलीम सिद्दीक़ी

ग़म-ए-हयात मिटाना है रो के देखते हैं

सलीम सिद्दीक़ी

सदियों के रंग-ओ-बू को न ढूँडो गुफाओं में

सलीम शहज़ाद

दिल तुझे नाज़ है जिस शख़्स की दिलदारी पर

सलीम कौसर

देवता बनने की हसरत में मुअल्लक़ हो गए

सलीम अहमद

नुक़्ता

सलीम अहमद

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