आंख Poetry (page 40)

फलस्तीनी बच्चे के लिए लोरी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

एक रह-गुज़र पर

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

भाई

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अगस्त-1952

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हसरत-ए-दीद में गुज़राँ हैं ज़माने कब से

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गो सब को बहम साग़र ओ बादा तो नहीं था

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हर क़दम ख़ौफ़ है दहशत है रिया-कारी है

फ़ैय्याज़ रश्क़

ज़बानों का बोसा

फ़हमीदा रियाज़

उस का दिल तो अच्छा दिल था

फ़हमीदा रियाज़

मेघ दूत

फ़हमीदा रियाज़

इंक़िलाबी औरत

फ़हमीदा रियाज़

मुस्तमिन्दाँ को सताया न करो

फ़ाएज़ देहलवी

ये शहर ये ख़्वाबों का समुंदर न बचेगा

एज़ाज़ अफ़ज़ल

लहू ने क्या तिरे ख़ंजर को दिलकशी दी है

एज़ाज़ अफ़ज़ल

अब सराब के चश्मे मौजज़न नहीं होते

एज़ाज़ अफ़ज़ल

हम ने आँख से देखा कितने सूरज निकले डूब गए

एजाज़ उबैद

दूसरों की आँख ले कर भी पशेमानी हुई

एजाज़ उबैद

गलियों में भटकना रह-ए-आलाम में रहना

एजाज़ गुल

चल रहा हूँ पेश-ओ-पस-मंज़र से उकताया हुआ

एजाज़ गुल

हर एक शय की हक़ीक़त से बा-ख़बर देखूँ

एजाज़ अासिफ़

मुद्दतों के बा'द जब पहुँचा वो अपने गाँव में

एजाज़ तालिब

मुहाजिर

एजाज़ अहमद एजाज़

ग़म में इक मौज सरख़ुशी की है

एहतिशाम हुसैन

डर डर के जिसे मैं सुन रहा हूँ

एहतिशाम हुसैन

चराग़ दिल का था रौशन बुझा गया पानी

एहतिशाम अख्तर

इश्क़ को तक़लीद से आज़ाद कर

एहसान दानिश

दिल की रग़बत है जब आप ही की तरफ़

एहसान दानिश

मिसाल-ए-आईना रहना कोई मज़ाक़ नहीं

डॉक्टर आज़म

इस शहर-ए-निगाराँ की कुछ बात निराली है

दिवाकर राही

कभी आँसू कभी ख़्वाबों के धारे टूट जाते हैं

दिनेश ठाकुर

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