अश्क Poetry (page 10)

हार बना इन पारा-ए-दिल का माँग न गजरा फूलों का

शाह नसीर

फ़ुर्सत एक दम की है जूँ हबाब पानी याँ

शाह नसीर

दिल जल्वा-गाह-ए-सूरत-ए-जानाना हो गया

शाह नसीर

छोड़ा न तुझे ने राम क्या ये भी न हुआ वो भी न हुआ

शाह नसीर

चश्म में कब अश्क भर लाते हैं हम

शाह नसीर

उट्ठी है जब से दिल में मिरे इश्क़ की तरंग

शाह आसिम

कोई दम थमता नहीं बारान-ए-अश्क

शाह आसिम

कब मुझे ताला-ए-ना-साज़ पे रोना आया

शाग़िल क़ादरी

किसी के हाथ पर तहरीर होना

शफ़ीक़ सलीमी

बे-नाम दयारों से हम लोग भी हो आए

शफ़ीक़ सलीमी

वो गर्म आँसुओं की रवानी तमाम रात

शफ़ीक़ जौनपुरी

ऐसी नींद आई कि फिर मौत को प्यार आ ही गया

शफ़ीक़ जौनपुरी

फ़साना-ए-सितम-ए-काएनात कहते हैं

शायर फतहपुरी

सर-ए-बज़्म मेरी नज़र से जब वो निगाह-ए-होश-रुबा मिली

शादाँ इंदौरी

पानी पानी हो ख़जालत से हर इक चश्म-ए-हबाब

शाद लखनवी

लुंज वो पा-ए-तलब हूँ कहीं जा ही न सकूँ

शाद लखनवी

लब-ए-जाँ-बख़्श पर जो नाला है

शाद लखनवी

लब-ब-लब बिंत-उल-अनब हर-दम रहे

शाद लखनवी

क्या ये बुत बैठेंगे ख़ुदा बन कर

शाद लखनवी

ग़ैरों में हिना वो मल रहा है

शाद लखनवी

दिल की कहूँ या कहूँ जिगर की

शाद लखनवी

बद-गुमानी जो हुई शम्अ' से परवाने को

शाद लखनवी

किस पे क़ाबू जो तुझी पे नहीं क़ाबू अपना

शाद अज़ीमाबादी

ग़म-ए-फ़िराक़ मय ओ जाम का ख़याल आया

शाद अज़ीमाबादी

फ़क़त शोर-ए-दिल-ए-पुर-आरज़ू था

शाद अज़ीमाबादी

अब इंतिहा का तिरे ज़िक्र में असर आया

शाद अज़ीमाबादी

अब भी इक उम्र पे जीने का न अंदाज़ आया

शाद अज़ीमाबादी

गए बरस की यही बात यादगार रही

शबनम शकील

अक्सर अपने दर-पए-आज़ार हो जाते हैं हम

शबनम शकील

लम्हों का पथराव है मुझ पर सदियों की यलग़ार

शबनम रूमानी

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