अश्क Poetry (page 8)

दख़्ल हर दिल में तिरा मिस्ल-ए-सुवैदा हो गया

शैख़ अली बख़्श बीमार

ख़ुद को ख़ुद पर ही जो इफ़्शा कभी करना पड़ जाए

शहपर रसूल

तूफ़ान-ए-नूह लाने से ऐ चश्म फ़ाएदा

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

शब वस्ल की भी चैन से क्यूँकर बसर करें

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

कम-फ़हम हैं तो कम हैं परेशानियों में हम

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

कब निगह उस की इश्वा-बार नहीं

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

हुई या मुझ से नफ़रत या कुछ इस में किब्र-ओ-नाज़ आया

शौक़ क़िदवाई

एक आसेब का साया था जो सर से उतरा

शौकत काज़मी

कोई कुछ भी कहता रहे सब ख़ामोशी से सुन लेता है

शारिक़ कैफ़ी

सुकून-ए-क़ल्ब मयस्सर किसे जहान में है

शारिब मौरान्वी

जो आँसुओं की ज़बाँ को मियाँ समझने लगे

शारिब मौरान्वी

शोर थमने के बाद

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

नींद आँखों में समो लूँ तो सियह रात कटे

शमीम तारिक़

खंडर

शमीम करहानी

ख़ुद कोई चाक-गरेबाँ है रग-ए-जाँ के क़रीब

शमीम करहानी

गुलों पे साया-ए-ग़म-हा-ए-रोज़गार मिले

शमीम करहानी

हर शय तुझी को सामने लाए तो क्या करूँ

शमीम जयपुरी

मुझ को तिरे सुलूक से कोई गिला न था

शकील शम्सी

वो यूँ खो के मुझे पाया करेंगे

शकील बदायुनी

जज़्बात की रौ में बह गया हूँ

शकील बदायुनी

दिल मरकज़-ए-हिजाब बनाया न जाएगा

शकील बदायुनी

साहिल तमाम अश्क-ए-नदामत से अट गया

शकेब जलाली

ख़िज़ाँ के चाँद ने पूछा ये झुक के खिड़की में

शकेब जलाली

ने शिकवा-मंद दिल से न अज़-दस्त-दीदा हूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हमें याद आवती हैं बातें उस गुल-रू की रह रह के

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मिरे रोग का न मलाल कर मिरे चारा-गर

शहज़ाद नय्यर

इक आग फिर भड़क उट्ठी है दीदा ओ दिल में

शहज़ाद अहमद

ये किस के आने के इम्काँ दिखाई देते हैं

शहज़ाद अहमद

जब आफ़्ताब न निकला तो रौशनी के लिए

शहज़ाद अहमद

हम लोगों को अपने दिल के राज़ बताते रहते हैं

शहज़ाद अहमद

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