बिछड़ Poetry (page 7)

मेरा तो नाम रेत के सागर पे नक़्श है

आज़ाद गुलाटी

मैं बिछड़ कर तुझ से तेरी रूह के पैकर में हूँ

आज़ाद गुलाटी

मैं ख़ुद से दूर था और मुझ से दूर था वो भी

अतीक़ुल्लाह

ख़ुद को किसी की राह-गुज़र किस लिए करें

अतहर नासिक

ख़ुद को किसी की राहगुज़र किस लिए करें

अतहर नासिक

न मंज़िल हूँ न मंज़िल-आश्ना हूँ

अतहर नफ़ीस

कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा

अतहर नफ़ीस

करता मैं अब किसी से कोई इल्तिमास क्या

अतहर नादिर

जिस की ख़ातिर मैं ने दुनिया की तरफ़ देखा न था

अतीक़ अंज़र

हम तो बिछड़ के रो लेते हैं

अतीक़ इलाहाबादी

आँख से तारे टूट रहे हैं

असलम राशिद

कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं

असलम आज़ाद

कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं

असलम आज़ाद

अब यही सोचते रहते हैं बिछड़ कर तुझ से

आसिम वास्ती

एक आँसू में तिरे ग़म का अहाता करते

आसिम वास्ती

उन से मिला तो फिर मैं किसी का नहीं रहा

अशरफ़ शाद

बसीत-ए-दश्त की हुर्मत को बाम-ओ-दर दे दे

अशरफ़ जावेद

पलकों पे इंतिज़ार का मौसम सजा लिया

अशोक साहनी

पीला था चाँद और शजर बे-लिबास थे

अशफ़ाक़ नासिर

खुल कर तो वो मुझ से कभी मिलता ही नहीं है

अशफ़ाक़ हुसैन

गिरती है तो गिर जाए ये दीवार-ए-सुकूँ भी

अशफ़ाक़ हुसैन

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा

असद भोपाली

मैं वुसअतों से बिछड़ के तन्हा न जी सकूँगा

अरशद नईम

जो बुझ गए थे चराग़ फिर से जला रहा है

अरशद नईम

तख़्लीक़ की साअतों में

अंजुम सलीमी

एक और मुुहब्बत....

अंजुम सलीमी

शब-ए-फ़िराक़ अचानक ख़याल आया मुझे

अंजुम ख़याली

सर-ए-राह मिल के बिछड़ गए था बस एक पल का वो हादसा

अंजुम इरफ़ानी

बड़ी फ़र्ज़-आश्ना है सबा करे ख़ूब काम हिसाब का

अंजुम इरफ़ानी

किस का भेद कहाँ की क़िस्मत पगले किस जंजाल में है

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी

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