चाक Poetry (page 14)

मैं रोना चाहता हूँ ख़ूब रोना चाहता हूँ मैं

फ़रहत एहसास

कभी ख़ुदा कभी इंसान रोक लेता है

फ़रहत एहसास

काबा-ए-दिल दिमाग़ का फिर से ग़ुलाम हो गया

फ़रहत एहसास

तुम हो शायर मिरी जान जीते रहो

फ़रीद जावेद

कैसे मंज़र हैं जो इदराक में आ जाते हैं

फ़रह इक़बाल

ज़ब्त अपना शिआर था न रहा

फ़ानी बदायुनी

मर कर मरीज़-ए-ग़म की वो हालत नहीं रही

फ़ानी बदायुनी

कुछ कम तो हुआ रंज-ए-फ़रावान-ए-तमन्ना

फ़ानी बदायुनी

बे-अजल काम न अपना किसी उनवाँ निकला

फ़ानी बदायुनी

ये तमन्ना है कि इस तरह मुसलमाँ होता

फ़ना बुलंदशहरी

कहीं सुकूँ न मिला दिल को बज़्म-ए-यार के बा'द

फ़ना बुलंदशहरी

हुस्न-ए-बुताँ का इश्क़ मेरी जान हो गया

फ़ना बुलंदशहरी

दोनों जहाँ से आ गया कर के इधर उधर की सैर

फ़ैज़ान हाशमी

अपने ख़ला में ला कि ये तुम को दिखा रहा हूँ मैं

फ़ैज़ान हाशमी

ये मातम-ए-वक़्त की घड़ी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

उम्मीद-ए-सहर की बात सुनो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

नौहा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

क्या करें

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जश्न का दिन

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम लोग

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अगस्त1955

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अगस्त-1952

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज इक हर्फ़ को फिर ढूँडता फिरता है ख़याल

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गो सब को बहम साग़र ओ बादा तो नहीं था

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गर्मी-ए-शौक़-ए-नज़ारा का असर तो देखो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मदावा-ए-जुनूँ सैर-ए-गुलिस्ताँ से नहीं होता

एजाज़ वारसी

दर खोल के देखूँ ज़रा इदराक से बाहर

एजाज़ गुल

तंहाई

एजाज़ फ़ारूक़ी

फूलों से होगी धूल जुदा देखते रहो

एजाज़ अासिफ़

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