दर Poetry (page 28)

उड़े हैं होश मेरे इस ख़बर से

सीमा शर्मा सरहद

नज़र में अर्श-ए-बरीं है किसी को क्या मालूम

सीमा शकीब

एक मंज़र में कई बार उसे देख के देख

सीमा नक़वी

जिस्म-ए-बे-सर कोई बिस्मिल कोई फ़रियादी था

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

मुझे मुश्किल में यूँ अंदाज़ा-ए-मुश्किल नहीं होता

सय्यद एजाज़ अहमद रिज़वी

ग़म सहे रुस्वा हुए जज़्बात की तहक़ीर की

सय्यद आशूर काज़मी

हर किसी आँख का बदला हुआ मंज़र होगा

साईल इमरान

कोई भी लफ़्ज़-ए-इबरत-आश्ना मैं पढ़ नहीं सकता

सय्यद नसीर शाह

कोई दिलकश सा अफ़्साना किसी दिलदार की बातें

सौरभ शेखर

फ़ज़ा का हब्स चीरती हुई हवा उठे

सौरभ शेखर

'सौदा' तू इस ग़ज़ल को ग़ज़ल-दर-ग़ज़ल ही कह

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मक़्दूर नहीं उस की तजल्ली के बयाँ का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गर कीजिए इंसाफ़ तो की ज़ोर वफ़ा मैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

एक हम से तुझे नहीं इख़्लास

मोहम्मद रफ़ी सौदा

देखूँ हूँ यूँ मैं उस सितम-ईजाद की तरफ़

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बे-वज्ह नईं है आइना हर बार देखना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

अपने का है गुनाह बेगाने ने क्या किया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

नज़र के भेद सब अहल-ए-नज़र समझते हैं

सऊद उस्मानी

सलीब लाद के काँधे पे चल रहा हूँ मैं

सत्य नन्द जावा

हमारे जिस्म ने जिस जिस्म को बुलाया है

सत्य नन्द जावा

दश्त-ए-तन्हाई में हम ख़ाक उड़ा देते हैं

सत्य नन्द जावा

वही है दश्त-ए-सफ़र रहगुज़र से आगे भी

सत्तार सय्यद

ख़ला में लुढ़कती ज़मीन

सरवत ज़ेहरा

अजाइब-ख़ाना

सरवत ज़ेहरा

तुम्हारी मुंतज़िर यूँ तो हज़ारों घर बनाती हूँ

सरवत ज़ेहरा

हमीं को भूल गए आप के भी क्या कहने

सरवत मुख़तार

ज़मानों से दर-ए-इम्कान पर रक्खे हुए हैं

सरवर अरमान

तलख़ीस के बदन में तफ़्सीर बोलती है

सरवर अरमान

शब-ए-तारीक चुप थी दर-ओ-दीवार चुप थे

सरवर अरमान

सहर-ओ-शाम में तंज़ीम कहाँ होती है

सरवर अरमान

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