दर Poetry (page 34)

तारीकियों का हिसाब

सहर अंसारी

हिसाब-ए-शब

सहर अंसारी

अलाव

सहर अंसारी

सज़ा बग़ैर अदालत से मैं नहीं आया

सहर अंसारी

सदा अपनी रविश अहल-ए-ज़माना याद रखते हैं

सहर अंसारी

किसी भी ज़ख़्म का दिल पर असर न था कोई

सहर अंसारी

काम आई इश्क़ की दीवानगी कल रात को

सग़ीर अहमद सूफ़ी

अलग हैं हम कि जुदा अपनी रह-गुज़र में हैं

सग़ीर मलाल

वक़्त की उम्र क्या बड़ी होगी

साग़र सिद्दीक़ी

राहज़न आदमी रहनुमा आदमी

साग़र सिद्दीक़ी

है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं

साग़र सिद्दीक़ी

न कश्ती है न फ़िक्र-ए-ना-ख़ुदा है

साग़र निज़ामी

रोटी कपड़ा और मकान

साग़र ख़य्यामी

होली

साग़र ख़य्यामी

कितना पुर-सोज़ है ये नाला-ए-शब-गीर मिरा

साग़र ख़य्यामी

सामान तो गया था मगर घर भी ले गया

साग़र आज़मी

तड़प के रात बसर की जो इक मुहिम सर की

सफ़ी लखनवी

हुजूम-ए-यास में माँ की दुआ मिलती रही है

सफ़दर सलीम सियाल

दुरुस्त है कि मिरा हाल अब ज़ुबूँ भी नहीं

सफ़दर मीर

बहार आई है फिर पैरहन गुलाबी हो

सफ़दर मीर

ट्रिप

सईदुद्दीन

कटी पहाड़ी

सईदुद्दीन

गुज़र न जाए समाअ'त के सर्द-ख़ानों से

सईद शरीक़

ख़ंजर से करो बात न तलवार से पूछो

सईद राही

जब आईने दर-ओ-दीवार पर निकल आएँ

सईद नक़वी

किया है ख़ुद ही गिराँ ज़ीस्त का सफ़र मैं ने

सईद नक़वी

फ़सील-ए-ज़ात में दर तो तिरी इनायत है

सईद नक़वी

सफ़र ला सफ़र

सईद अहमद

निस्फ़ हिज्र के दयार से

सईद अहमद

मआनी की तलाश में मरते लफ़्ज़

सईद अहमद

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