दर Poetry (page 84)

ज़बाँ है मगर बे-ज़बानों में है

अमीर क़ज़लबाश

पाईं हर एक राह-गुज़र पर उदासियाँ

अमीर क़ज़लबाश

नज़र आने से पहले डर रहा हूँ

अमीर क़ज़लबाश

मिरे हाल पर मेहरबानी करे

अमीर क़ज़लबाश

ख़ौफ़ बन कर ये ख़याल आता है अक्सर मुझ को

अमीर क़ज़लबाश

दर्द का शहर कहीं कर्ब का सहरा होगा

अमीर क़ज़लबाश

आँखें खुली हुई हैं तो मंज़र भी आएगा

अमीर क़ज़लबाश

तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है

अमीर मीनाई

जो चाहिए सो माँगिये अल्लाह से 'अमीर'

अमीर मीनाई

हो गया बंद दर-ए-मै-कदा क्या क़हर हुआ

अमीर मीनाई

बरहमन दैर से काबे से फिर आए हाजी

अमीर मीनाई

तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है

अमीर मीनाई

तिरा क्या काम अब दिल में ग़म-ए-जानाना आता है

अमीर मीनाई

न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का

अमीर मीनाई

हैं न ज़िंदों में न मुर्दों में कमर के आशिक़

अमीर मीनाई

फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा

अमीर मीनाई

दिल को तर्ज़-ए-निगह-ए-यार जताते आए

अमीर मीनाई

चाँद सा चेहरा नूर की चितवन माशा-अल्लाह माशा-अल्लाह

अमीर मीनाई

अमीर लाख इधर से उधर ज़माना हुआ

अमीर मीनाई

तशन्नुज

अमीक़ हनफ़ी

तअल्लुक़ तोड़ने वाले

अमीक़ हनफ़ी

अंधेरे में सोचने की मश्क़

अमीक़ हनफ़ी

तीरगी ही तीरगी है बाम-ओ-दर में कौन है

अमीन राहत चुग़ताई

रख दिया मैं ने दर-ए-हुस्न पे हारा हुआ इश्क़

अमीन अडीराई

आईना देख कर न तो शीशे को देख कर

अम्बर वसीम इलाहाबादी

'क़ुर्रतुल-ऐन-हैदर'

अम्बरीन सलाहुद्दीन

जंगल

अम्बरीन सलाहुद्दीन

एक कहानी

अम्बरीन सलाहुद्दीन

जब मिरे शहर की हर शाम ने देखा उस को

अम्बरीन सलाहुद्दीन

हम सितारों में तिरा अक्स ना ढलने देंगे

अम्बरीन सलाहुद्दीन

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