दर Poetry (page 82)

उम्र की सारी थकन लाद के घर जाता हूँ

अंजुम सलीमी

दीवार पे रक्खा तो सितारे से उठाया

अंजुम सलीमी

बस एक जिस्म एक ही क़द में पड़ा रहूँ

अंजुम सलीमी

अच्छे मौसम में तग-ओ-ताज़ भी कर लेता हूँ

अंजुम सलीमी

यहाँ तो फिर वही दीवार-ओ-दर निकल आए

अंजुम रूमानी

दुखी दिलों के लिए ताज़ियाना रखता है

अंजुम रूमानी

माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं

अंजुम रहबर

जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है

अंजुम रहबर

मिरे मज़ार पे आ कर दिए जलाएगा

अंजुम ख़याली

ऐ शब-ए-ग़म जो हम भी घर जाएँ

अंजुम ख़याली

जब तक फ़सील-ए-जिस्म का दर खुल न जाएगा

अंजुम ख़लीक़

हम अपने ज़ौक़-ए-सफ़र को सफ़र सितारा करें

अंजुम ख़लीक़

जो न हों कुछ तशरीह-तलब कम होते हैं

अंजुम इरफ़ानी

जो शब भर आँसुओं से तर रहेगा

अंजुम आज़मी

हूर-ओ-ग़िल्माँ के तलबगार से वाक़िफ़ मैं हूँ

अंजुम अज़ीमाबादी

दीदा-ए-तर में कौन रहेगा

अनीस अब्र

म'अरका जब छिड़ गया तो क्या हुआ हम से सुनो

अनीस अशफ़ाक़

नाम तेरा भी रहेगा न सितमगर बाक़ी

अनीस अंसारी

मिरा हर तीर निशाने पे न पहुँचा आख़िर

अनीस अंसारी

जहाँ दर था वहाँ दीवार क्यूँ है

अनीस अंसारी

इस शहर के लोग अजीब से हैं अब सब ही तुम्हारे असीर हुए

अनीस अंसारी

चलो ये सच ही सही होगा ना-गहाँ गुज़रे

अनीस अहमद अनीस

रह-रवी है न रहनुमाई है

आनंद नारायण मुल्ला

भूले से भी लब पर सुख़न अपना नहीं आता

आनंद नारायण मुल्ला

ये मय-कश कौन बा-सद लग़्ज़िश-ए-मस्ताना आता है

अम्न लख़नवी

उमीदें तो वाबस्ता हैं अब्र-ए-तर से

अम्न लख़नवी

यूँही बे-बाल-ओ-पर खड़े हुए हैं

अम्मार इक़बाल

अक्स कितने उतर गए मुझ में

अम्मार इक़बाल

तुम जल्वा दिखाओ तो ज़रा पर्दा-ए-दर से

अमजद नजमी

देख कर हम को असीर-ए-आरज़ू

अमजद नजमी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.