दीवार Poetry (page 22)

साल की आख़िरी शब

सलीम कौसर

ये लोग जिस से अब इंकार करना चाहते हैं

सलीम कौसर

क्या बताएँ फ़स्ल-ए-बे-ख़्वाबी यहाँ बोता है कौन

सलीम कौसर

कोई याद ही रख़्त-ए-सफ़र ठहरे कोई राहगुज़र अनजानी हो

सलीम कौसर

चराग़-ए-याद की लौ हम-सफ़र कहाँ तक है

सलीम कौसर

आब ओ हवा है बरसर-ए-पैकार कौन है

सलीम कौसर

खो दिए हैं चाँद कितने इक सितारा माँग कर

सलीम फ़िगार

ये ख़याल अब तो दिल-आज़ार हमारे लिए है

सलीम फ़राज़

क्या लुत्फ़ हवाओं के सफ़र में नहीं रक्खा

सलीम फ़राज़

एक तो दुनिया का कारोबार है

सलीम फ़राज़

देख माज़ी के दरीचों को कभी खोला न कर

सलीम फ़राज़

नींद से पहले

सलीम अहमद

नया मकान

सलीम अहमद

उम्र भर काविश-ए-इज़हार ने सोने न दिया

सलीम अहमद

मिला जो काम ग़म-ए-मो'तबर बनाने का

सलीम अहमद

लम्हा-ए-रफ़्ता का दिल में ज़ख़्म सा बन जाएगा

सलीम अहमद

देखने के लिए इक शर्त है मंज़र होना

सलीम अहमद

बन के दुनिया का तमाशा मो'तबर हो जाएँगे

सलीम अहमद

ऐ मिरे घर की फ़ज़ाओं से गुरेज़ाँ महताब

सलाम मछली शहरी

इन ग़ज़ालान-ए-तरह-दार को कैसे छोड़ूँ

सलाम मछली शहरी

जिस के घर जाते न थे हज़रत-ए-दिल

सख़ी लख़नवी

इश्क़ है यार का ख़ुदा-हाफ़िज़

सख़ी लख़नवी

ये कैसा हादसा गुज़रा ये कैसा सानेहा बीता

सज्जाद शम्सी

दुआओं में असर बाक़ी न आहों में असर बाक़ी

सज्जाद शम्सी

दीवार क़हक़हा

सज्जाद बाक़र रिज़वी

सोए हुओं में ख़्वाब से बेदार कौन है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

नवाह-ए-शौक़ में है इक दयार-ए-निकहत-ए-गुल

सज्जाद बाक़र रिज़वी

दुनिया दुनिया सैर सफ़र थी शौक़ की राह तमाम हुई

सज्जाद बाक़र रिज़वी

देख पाई न मिरे साए में चलता साया

सज्जाद बलूच

लफ़्ज़ का कितना तक़द्दुस है ये कब जानते हैं

सज्जाद बाबर

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