धूप Poetry (page 28)

कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा

अतहर नफ़ीस

कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा

अतहर नफ़ीस

इतने दिन के बाद तू आया है आज

अतहर नफ़ीस

सुलगती रेत की क़िस्मत में दरिया लिख दिया जाए

अतीक़ अंज़र

कहानियाँ ख़मोश हैं पहेलियाँ उदास हैं

अतीक़ अंज़र

जिस की ख़ातिर मैं ने दुनिया की तरफ़ देखा न था

अतीक़ अंज़र

दर्द की धूप में सहरा की तरह साथ रहे

अता शाद

पारसाओं ने बड़े ज़र्फ़ का इज़हार किया

अता शाद

आग जो दिल में लगी है वो बुझा दी जाए

असरा रिज़वी

मुसलसल धूप से पाला पड़ा है

असलम राशिद

जब उस की तस्वीर बनाई जाती है

असलम राशिद

ज़लज़ले का ख़ौफ़ तारी है दर-ओ-दीवार पर

असलम कोलसरी

ज़ीस्त की धूप से यूँ बच के निकलता क्यूँ है

असलम हबीब

शाम का रक़्स

असलम इमादी

मौत का इंतिज़ार सफ़ेद चाक से

असलम इमादी

कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं

असलम आज़ाद

कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं

असलम आज़ाद

बाम-ओ-दर पर उतरने वाली धूप

आसिमा ताहिर

तेरी यादें बहाल रखती है

आसिमा ताहिर

सुनहरी धूप से चेहरा निखार लेती हूँ

आसिमा ताहिर

ज़ाविया धूप ने कुछ ऐसा बनाया है कि हम

आसिम वास्ती

है नींद अभी आँख में पल भर में नहीं है

आसिम वास्ती

दामन-ए-गुल में कहीं ख़ार छुपा देखते हैं

आसिम वास्ती

चाँद तारों से भरा ये आसमाँ दे जाऊँगा

अशरफ़ शाद

बहुत ख़ामोश रह कर जो सदाएँ मुझ को देता था

आशिर वकील राव

दिमाग़-ओ-दिल में हलचल हो रही है

अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी

तेरे बदन की धूप से महरूम कब हुआ

अशअर नजमी

तेरे बदन की धूप से महरूम कब हुआ

अशअर नजमी

किसी की चाह में ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है

असग़र वेलोरी

सफ़र से लौट आने वाली हवा

असग़र नदीम सय्यद

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