दिल Poetry (page 173)

गर्म इन रोज़ों में कुछ इश्क़ का बाज़ार नहीं

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

उस के कूचे में बहुत रहते हैं दीवाने पड़े

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

तुझ को आती है दिलासे की नहीं बात कोई

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

ता हश्र रहे ये दाग़ दिल का

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

इश्क़ से बच के किधर जाएँगे हम

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

गर्म इन रोज़ों में कुछ इश्क़ का बाज़ार नहीं

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

चाह कर हम उस परी-रू को जो दीवाने हुए

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

हमारा दिल तो ग़म में भी ख़ुशी महसूस करता है

राणा गन्नौरी

भला कह दिया या बुरा कह दिया

राणा गन्नौरी

तुझ से कहना था हाल-ए-दिल लेकिन

राना आमिर लियाक़त

गले लगा के मुझे पूछ मसअला क्या है

राना आमिर लियाक़त

ये जो चार दिन की थी ज़िंदगी इसे तेरे नाम न कर सका

राना आमिर लियाक़त

तू कोई ख़्वाब नहीं जिस से किनारा कर लें

राना आमिर लियाक़त

कार-ए-जुनूँ की हालतें, कार-ए-ख़ुदा ख़याल कर

राना आमिर लियाक़त

एक तू, एक आशिक़ी मेरी

राना आमिर लियाक़त

बर्फ़ पिघली तो रास्ता निकला

राना आमिर लियाक़त

बना हुआ है हमारा कसी बहाने से

राना आमिर लियाक़त

सुनते हैं कि मिल जाती है हर चीज़ दुआ से

राना अकबराबादी

सिर्फ़ बच्चे ही नहीं शोर मचाने आते

रम्ज़ी असीम

मुझ में ख़ुश्बू बसी उसी की है

रम्ज़ी असीम

दर्द-ए-दिल जब कभी अयाँ होगा

रमज़ान अली सहर

निगाह तूर पे है और जमाल सीने में

रम्ज़ अज़ीमाबादी

इस सदी का जब कभी ख़त्म-ए-सफ़र देखेंगे लोग

रम्ज़ अज़ीमाबादी

है समुंदर सामने प्यासे भी हैं पानी भी है

रम्ज़ अज़ीमाबादी

रख लिया बार-ए-अमानत सर पे बे-ख़ौफ़ी के साथ

रम्ज़ आफ़ाक़ी

वो जो भी बख़्शें वो इनआम ले लिया जाए

रम्ज़ आफ़ाक़ी

तुम्हारा क़ुर्ब वजह-ए-इज़्तिराब-ए-दिल न बन जाए

रम्ज़ आफ़ाक़ी

झिलमिलाते हुए आँसू भी अजब होते हैं

रम्ज़ आफ़ाक़ी

इश्क़ की ऐसी शान तो होगी

रम्ज़ आफ़ाक़ी

घर है तिरा तू शौक़ से आने के लिए आ

रम्ज़ आफ़ाक़ी

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