दिल Poetry (page 33)

देहली

वामिक़ जौनपुरी

अलिफ़ लैला

वामिक़ जौनपुरी

ज़बाँ तक जो न आए वो मोहब्बत और होती है

वामिक़ जौनपुरी

तुझ से मिल कर दिल में रह जाती है अरमानों की बात

वामिक़ जौनपुरी

शीशा उस का अजीब है ख़ुद ही

वामिक़ जौनपुरी

शमएँ रौशन हैं आबगीनों में

वामिक़ जौनपुरी

क़िर्तास पे नक़्शे हमें क्या क्या नज़र आए

वामिक़ जौनपुरी

नए गुल खिले नए दिल बने नए नक़्श कितने उभर गए

वामिक़ जौनपुरी

मिरे फ़िक्र ओ फ़न को नई फ़ज़ा नए बाल-ओ-पर की तलाश है

वामिक़ जौनपुरी

ख़लिश सुकूँ का मुदावा नहीं तो कुछ भी नहीं

वामिक़ जौनपुरी

जीने का लुत्फ़ कुछ तो उठाओ नशे में आओ

वामिक़ जौनपुरी

हुज़ूर-ए-यार भी आज़ुर्दगी नहीं जाती

वामिक़ जौनपुरी

हालात से फ़रार की क्या जुस्तुजू करें

वामिक़ जौनपुरी

दीवाने दीवाने ठहरे खेल गए अँगारों से

वामिक़ जौनपुरी

दिल तोड़ कर वो दिल में पशीमाँ हुआ तो क्या

वामिक़ जौनपुरी

दिल परेशाँ है न जाने किस लिए

वामिक़ जौनपुरी

दिल के वीराने को यूँ आबाद कर लेते हैं हम

वामिक़ जौनपुरी

दिल अज़ल से मरकज़-ए-आलाम है

वामिक़ जौनपुरी

अपना एजाज़ दिखा दे साक़ी

वामिक़ जौनपुरी

कल तलक जो था तसव्वुर अंजुमन-आराइयों का

वलीउल्लाह वली

है क़ानून-ए-फ़ितरत कोई क्या करेगा

वलीउल्लाह वली

बे-नियाज़ नग़्मा-ए-दुनिया हूँ मैं

वलीउल्लाह वली

आप की नज़रों में शायद इस लिए अच्छा हूँ मैं

वलीउल्लाह वली

ख़याल दिल को है उस गुल से आश्नाई का

वलीउल्लाह सरहिंदी इशतियाक़

वो जो लैला है मिरे दिल में सुने उस का जो शोर

वलीउल्लाह मुहिब

उस के कूचे ही में आ निकलूँ हूँ जाऊँ जिस तरफ़

वलीउल्लाह मुहिब

तिरे कलाम ने कैसा असर किया वाइ'ज़

वलीउल्लाह मुहिब

निकालूँ दिल से मैं नाले की किस तरह आवाज़

वलीउल्लाह मुहिब

न कीजे वो कि मियाँ जिस से दिल कोई हो मलूल

वलीउल्लाह मुहिब

काफ़िर हूँ गर मैं नाम भी का'बे का लूँ कभी

वलीउल्लाह मुहिब

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