दिल Poetry (page 37)

बंदे हैं तेरी छब के मह से जमाल वाले

वली उज़लत

बहार आई जुनूँ लेगा हमारा इम्तिहाँ देखें

वली उज़लत

बहार आई ब-तंग आया दिल-ए-वहशत-पनाह अपना

वली उज़लत

असीरी बे-मज़ा लगती है बिन-सय्याद क्या कीजे

वली उज़लत

ऐ यार मुझ अफ़सुर्दा-ए-हिज्राँ को पहुँच तू

वली उज़लत

अगर मैं मोजज़े को ख़ाकसारी के अयाँ करता

वली उज़लत

अबस तोड़ा मिरा दिल नाज़ सिखलाने के काम आता

वली उज़लत

आज दिल बे-क़रार है मेरा

वली उज़लत

याद करना हर घड़ी तुझ यार का

वली मोहम्मद वली

तेरे लब के हुक़ूक़ हैं मुझ पर

वली मोहम्मद वली

न हो क्यूँ शोर दिल की बाँसुली में

वली मोहम्मद वली

आज तुझ याद ने ऐ दिलबर-ए-शीरीं-हरकात

वली मोहम्मद वली

याद करना हर घड़ी उस यार का

वली मोहम्मद वली

वो नाज़नीं अदा में एजाज़ है सरापा

वली मोहम्मद वली

सजन टुक नाज़ सूँ मुझ पास आ आहिस्ता आहिस्ता

वली मोहम्मद वली

मुश्ताक़ हैं उश्शाक़ तिरी बाँकी अदा के

वली मोहम्मद वली

मत ग़ुस्से के शो'ले सूँ जलते कूँ जलाती जा

वली मोहम्मद वली

मैं आशिक़ी में तब सूँ अफ़्साना हो रहा हूँ

वली मोहम्मद वली

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

वली मोहम्मद वली

कमर उस दिलरुबा की दिलरुबा है

वली मोहम्मद वली

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

वली मोहम्मद वली

जिस दिलरुबा सूँ दिल कूँ मिरे इत्तिहाद है

वली मोहम्मद वली

जब तुझ अरक़ के वस्फ़ में जारी क़लम हुआ

वली मोहम्मद वली

इश्क़ में सब्र-ओ-रज़ा दरकार है

वली मोहम्मद वली

इश्क़ बेताब-ए-जाँ-गुदाज़ी है

वली मोहम्मद वली

हुए हैं राम पीतम के नयन आहिस्ता-आहिस्ता

वली मोहम्मद वली

हुआ ज़ाहिर ख़त-ए-रू-ए-निगार आहिस्ता-आहिस्ता

वली मोहम्मद वली

दिल तलबगार-ए-नाज़-ए-मह-वश है

वली मोहम्मद वली

दिल कूँ तुझ बाज बे-क़रारी है

वली मोहम्मद वली

देखना हर सुब्ह तुझ रुख़्सार का

वली मोहम्मद वली

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