दिन Poetry (page 37)

उस सादा-दिल से कुछ मुझे 'बाक़र' गिला न था

सज्जाद बाक़र रिज़वी

तुझे मैं मिलूँ तो कहाँ मिलूँ मिरा तुझ से रब्त मुहाल है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

राहों के ऊँच-नीच ज़रा देख-भाल के

सज्जाद बाक़र रिज़वी

मिरे सफ़र की हदें ख़त्म अब कहाँ होंगी

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हज़ार शुक्र कभी तेरा आसरा न गया

सज्जाद बाक़र रिज़वी

गलियाँ झाकीं सड़कें छानीं दिल की वहशत कम न हुई

सज्जाद बाक़र रिज़वी

दिल की बिसात पे शाह प्यादे कितनी बार उतारोगे

सज्जाद बाक़र रिज़वी

अपने जीने को क्या पूछो सुब्ह भी गोया रात रही

सज्जाद बाक़र रिज़वी

अँधेरे दिन की सफ़ारत को आए हैं अब के

सज्जाद बाक़र रिज़वी

लफ़्ज़ का कितना तक़द्दुस है ये कब जानते हैं

सज्जाद बाबर

इक दर्द सब के दर्द का मज़हर लगा मुझे

सज्जाद बाबर

हमारी रूह का नग़्मा कहाँ है?

साजिदा ज़ैदी

तारे सारे रक़्स करेंगे चाँद ज़मीं पर उतरेगा

साजिद हाश्मी

ऐसी आग फ़लक से बरसेगी इक दिन

साजिद हमीद

शिकस्ता-दिल थे तिरा ए'तिबार क्या करते

साजिद अमजद

बूटा बूटा मुँह खोलेगा पत्ता पत्ता बोलेगा

सैलानी सेवते

अपने अंजाम से बे-ख़बर ज़िंदगी

सैलानी सेवते

शोर दिन को नहीं सोने देता

सैफ़ुद्दीन सैफ़

क्या क़यामत है हिज्र के दिन भी

सैफ़ुद्दीन सैफ़

जिस दिन से भुला दिया है तू ने

सैफ़ुद्दीन सैफ़

क्यूँ उजड़ जाती है दिल की महफ़िल

सैफ़ुद्दीन सैफ़

कुछ तो रंगीनी-ए-अफ़कार खुले

सैफ़ुद्दीन सैफ़

जी दर्द से है निढाल अपना

सैफ़ुद्दीन सैफ़

हम को तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया

सैफ़ुद्दीन सैफ़

ख़्वाहिश से कहीं कोई माहौल बदलता है

सैफ़ी प्रेमी

तन्हाई के शो'लों पे मचलने के लिए था

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

वो पर्दा ज़ीनत-ए-दर के सिवा कुछ और नहीं

सैफ़ बिजनोरी

सुख़न-वर हूँ सुख़न-फ़हमी की लज़्ज़त बाँट देता हूँ

सईद इक़बाल सादी

तुझ को ख़बर नहीं मगर इक सादा-लौह को

साहिर लुधियानवी

बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो

साहिर लुधियानवी

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