दिन Poetry (page 36)

नहीं रहा मैं तिरे रास्ते का पत्थर भी

सलीम अहमद

दिल जो इस बज़्म में आता है तो जाता ही नहीं

सलीम अहमद

और तो क्या दिया बहारों ने

सलीम अहमद

राख

सलीम अहमद

नींद से पहले

सलीम अहमद

ये ख़्वाब और भी देखेंगे रात बाक़ी है

सलीम अहमद

वो लोग भी हैं जो मौजों से डर गए होंगे

सलीम अहमद

'सलीम' दश्त-ए-तमन्ना में कौन है किस का

सलीम अहमद

न पूछो अक़्ल की चर्बी चढ़ी है उस की बोटी पर

सलीम अहमद

कोई सितारा-ए-गिर्दाब आश्ना था मैं

सलीम अहमद

इश्क़ में जिस के ये अहवाल बना रक्खा है

सलीम अहमद

इस आँख में ख़्वाब-ए-नाज़ हो जा

सलीम अहमद

दीदनी है हमारी ज़ेबाई

सलीम अहमद

हुई सुब्ह जाम खनक उठे हुई शाम नग़्मे बिखर गए

सलाम संदेलवी

काश तुम समझ सकतीं ज़िंदगी में शाएर की ऐसे दिन भी आते हैं

सलाम मछली शहरी

धुआँ

सलाम मछली शहरी

ये अब्र-ओ-बाद ये तूफ़ान ये अँधेरी रात

सलाम मछली शहरी

सुब्ह-दम भी यूँ फ़सुर्दा हो गया

सलाम मछली शहरी

सरहद-ए-फ़ना तक भी तीरगी नहीं आई

सलाम मछली शहरी

काश तुम समझ सकतीं ज़िंदगी में शाएर की ऐसे दिन भी आते हैं

सलाम मछली शहरी

पहली नज़्म

सलाहुद्दीन परवेज़

तीस दिन यार अब न आएगा

सख़ी लख़नवी

देखें कहता है ख़ुदा हश्र के दिन

सख़ी लख़नवी

बहुत ख़्वाब-ए-ग़फ़लत में दिन चढ़ गया

सख़ी लख़नवी

इश्क़ करने में दिल भी क्या है शोख़

सख़ी लख़नवी

दुल्हन भी अगर बन के आएगी रात

सख़ी लख़नवी

दिल ही मेरा फ़क़त है मतलब का

सख़ी लख़नवी

चश्म-ए-मय-गूँ वहाँ शराब लज़ीज़

सख़ी लख़नवी

हमें तो हर्फ़-ए-तमन्ना ज़बाँ पे लाना है

सज्जाद सय्यद

मैं सरगिराँ था हिज्र की रातों के क़र्ज़ से

सज्जाद बाक़र रिज़वी

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