हुआ Poetry (page 103)

जो हवा है सूरत-ए-बाद-ए-मुख़ालिफ़ तेज़ है

रशीद लखनवी

जब से सुना दहन तिरे ऐ माह-रू नहीं

रशीद लखनवी

हिज्र है अब था यहीं में ज़ार हम पहलू-ए-दोस्त

रशीद लखनवी

हाए शर्म-ए-दिलबरी उस दिलरुबा के हाथ है

रशीद लखनवी

डर नहीं थूकते हैं ख़ून जो दुख पाए हुए

रशीद लखनवी

हुस्न क्या जिस को किसी हुस्न से ख़तरा न हुआ

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

हिम्मत-ए-आली का इतना तो ज़ियाँ होना ही था

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

रिश्ता-ए-दिल भी किसी दिन ख़्वाब सा हो जाएगा

रशीद कामिल

दिल की इमारत झूटे जज़्बों पर ता'मीर नहीं करना

रशीद अयाँ

तन्हाइयों के दर्द से रिसता हुआ लहू

रशीद अफ़रोज़

शो'ला शमीम-ए-ज़ुल्फ़ से आगे बढ़ा नहीं

रशीद अफ़रोज़

उन की ख़ल्वत में 'रसा' भी होगा

रसा रामपुरी

कौन सा इश्क़-ए-बुताँ में हमें सदमा न हुआ

रसा रामपुरी

आने को नज़र में मिरी सौ फ़ित्ना-गर आए

रसा रामपुरी

तिरे नज़दीक आ कर सोचता हूँ

रसा चुग़ताई

और कुछ यूँ हुआ कि बच्चों ने

रसा चुग़ताई

उम्र गुज़री रहगुज़र के आस-पास

रसा चुग़ताई

तिरे नज़दीक आ कर सोचता हूँ

रसा चुग़ताई

रात हम ने जहाँ बसर की है

रसा चुग़ताई

रात है या हवा मकानों में

रसा चुग़ताई

मोहब्बत ख़ब्त है या वसवसा है

रसा चुग़ताई

ख़्वाब उस के हैं जो चुरा ले जाए

रसा चुग़ताई

ख़्वाब उस के हैं जो चुरा ले जाए

रसा चुग़ताई

जब तक दौर-ए-जाम चलेगा

रसा चुग़ताई

इस से पहले नज़र नहीं आया

रसा चुग़ताई

अपनी बे-चेहरगी में पत्थर था

रसा चुग़ताई

झुलसती धूप में ठंडी हवा का झोंका भेज

रऊफ़ अमीर

सौदा-ए-सज्दा शाम-ओ-सहर मेरे सर में है

रंजूर अज़ीमाबादी

मैं और हम-आग़ोश हूँ उस रश्क-ए-परी से

रंजूर अज़ीमाबादी

हम जूँ चकोर ग़श हैं अजी एक यार पर

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

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