हुआ Poetry (page 225)

दुआ की राख पे मरमर का इत्र-दाँ उस का

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

बहुत न हौसला-ए-इज़्ज़-ओ-जाह मुझ से हुआ

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

किसी ने मुझ से कह दिया था ज़िंदगी पे ग़ौर कर

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

मैं ख़ाक में मिले हुए गुलाब देखता रहा

अफ़ज़ाल फ़िरदौस

नर्स

आफ़ताब शम्सी

टूटा हुआ आईना जो रस्ते में पड़ा था

आफ़ताब शम्सी

देर तक रात अँधेरे में जो मैं ने देखा

आफ़ताब शम्सी

गो सुध नहीं उस शोख़ सितमगर ने सँभाली

आफ़ताब शाह आलम सानी

ख़्वाब के आगे शिकस्त-ए-ख़्वाब का था सामना

आफ़ताब इक़बाल शमीम

कहा था किस ने कि शाख़-ए-नहीफ़ से फूटें

आफ़ताब इक़बाल शमीम

हिज्र-ज़ाद

आफ़ताब इक़बाल शमीम

दीवार-ए-चीन

आफ़ताब इक़बाल शमीम

ये जो ठहरा हुआ मंज़र है बदलता ही नहीं

आफ़ताब इक़बाल शमीम

वो आसमाँ के दरख़शिंदा राहियोँ जैसा

आफ़ताब इक़बाल शमीम

रिज़्क़ का जब नादारों पर दरवाज़ा बंद हुआ

आफ़ताब इक़बाल शमीम

पंजों के बल खड़े हुए शब की चटान पर

आफ़ताब इक़बाल शमीम

नज़र के सामने रहना नज़र नहीं आना

आफ़ताब इक़बाल शमीम

मिसाल-ए-सैल-ए-बला न ठहरे हवा न ठहरे

आफ़ताब इक़बाल शमीम

मैं अपने वास्ते रस्ता नया निकालता हूँ

आफ़ताब इक़बाल शमीम

जब चाहा ख़ुद को शाद या नाशाद कर लिया

आफ़ताब इक़बाल शमीम

हज़ीमतें जो फ़ना कर गईं ग़ुरूर मिरा

आफ़ताब इक़बाल शमीम

हर किसी का हर किसी से राब्ता टूटा हुआ

आफ़ताब इक़बाल शमीम

हाँफती नद्दी में दम टूटा हुआ था लहर का

आफ़ताब इक़बाल शमीम

दिखाई जाएगी शहर-ए-शब में सहर की तमसील चल के देखें

आफ़ताब इक़बाल शमीम

वो सर से पाँव तक है ग़ज़ब से भरा हुआ

आफ़ताब हुसैन

वक़्त की वहशी हवा क्या क्या उड़ा कर ले गई

आफ़ताब हुसैन

मिलता है आदमी ही मुझे हर मक़ाम पर

आफ़ताब हुसैन

किन मंज़रों में मुझ को महकना था 'आफ़्ताब'

आफ़ताब हुसैन

वो सर से पाँव तक है ग़ज़ब से भरा हुआ

आफ़ताब हुसैन

क़दम क़दम पे किसी इम्तिहाँ की ज़द में है

आफ़ताब हुसैन

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.