हुआ Poetry (page 224)

परिंदे लड़ ही पड़े जाएदाद पर आख़िर

अफ़ज़ल ख़ान

तो फिर वो इश्क़ ये नक़्द-ओ-नज़र बराए-फ़रोख़्त

अफ़ज़ल ख़ान

नहीं था ध्यान कोई तोड़ते हुए सिगरेट

अफ़ज़ल ख़ान

मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी

अफ़ज़ल ख़ान

कल अपने शहर की बस में सवार होते हुए

अफ़ज़ल ख़ान

जब इक सराब में प्यासों को प्यास उतारती है

अफ़ज़ल ख़ान

मैं एक इश्क़ में नाकाम क्या हुआ 'गौहर'

अफ़ज़ल गौहर राव

किस प्यास से ख़ाली हुआ मश्कीज़ा हमारा

अफ़ज़ल गौहर राव

अपने बदन से लिपटा हुआ आदमी था मैं

अफ़ज़ल गौहर राव

ये जो सूरज है ये सूरज भी कहाँ था पहले

अफ़ज़ल गौहर राव

मिसाल-ए-बर्ग किसी शाख़ से झड़े हुए हैं

अफ़ज़ल गौहर राव

मैं ख़ुद को इस लिए मंज़र पे लाने वाला नहीं

अफ़ज़ल गौहर राव

मैं अपनी ज़ात में जब से सितारा होने लगा

अफ़ज़ल गौहर राव

हर आइने में तिरा ही धुआँ दिखाई दिया

अफ़ज़ल गौहर राव

चुप-चाप निकल आए थे सहरा की तरफ़ हम

अफ़ज़ल गौहर राव

आई थी उस तरफ़ जो हवा कौन ले गया

अफ़ज़ल गौहर राव

गुज़रे तअ'ल्लुक़ात का अब वास्ता न दे

अफ़ज़ल अलवी

ये हक़ीक़त है वो कमज़ोर हुआ करती हैं

अफ़ज़ल इलाहाबादी

ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो

अफ़ज़ल इलाहाबादी

अश्क आँखों में लिए आठों पहर देखेगा कौन

अफ़ज़ल इलाहाबादी

मैं चाहता हूँ मुझे मशअलों के साथ जला

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

कमान-ए-ख़ाना-ए-अफ़्लाक के मुक़ाबिल भी

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

सिर्फ़ ग़ैर-अहम शाएर

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

मोहब्बत

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

ये नहर-ए-आब भी उस की है मुल्क-ए-शाम उस का

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

रौशन वो दिल पे मेरे दिल-आज़ार से हुआ

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

कुछ और रंग मैं तरतीब-ए-ख़ुश्क-ओ-तर करता

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

कोई न हर्फ़-ए-नवेद-ओ-ख़बर कहा उस ने

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

हुआ है क़त्अ मिरा दस्त-ए-मोजज़ा तुझ पे

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

गिरा तो गिर के सर-ए-ख़ाक-ए-इब्तिज़ाल आया

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

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