हुआ Poetry (page 70)

दिल से

शहाब अख़्तर

ये अब्र है या फ़ील-ए-सियह-मस्त है साक़ी

शाह नसीर

रख क़दम होश्यार हो कर इश्क़ की मंज़िल में आह

शाह नसीर

इश्क़ ही दोनों तरफ़ जल्वा-ए-दिलदार हुआ

शाह नसीर

हम दिखाएँगे तमाशा तुझ को फिर सर्व-ए-चमन

शाह नसीर

दे मुझ को भी इस दौर में साक़ी सिपर-ए-जाम

शाह नसीर

बोसा-ए-ख़ाल-ए-लब-ए-जानाँ की कैफ़िय्यत न पूछ

शाह नसीर

तू ज़िद से शब-ए-वस्ल न आया तो हुआ क्या

शाह नसीर

सरज़मीन-ए-ज़ुल्फ़ में क्या दिल ठिकाने लग गया

शाह नसीर

रंग मैला न हुआ जामा-ए-उर्यानी का

शाह नसीर

क़दम न रख मिरी चश्म-ए-पुर-आब के घर में

शाह नसीर

निकहत-ए-गुल हैं या सबा हैं हम

शाह नसीर

न दिखाइयो हिज्र का दर्द-ओ-अलम तुझे देता हूँ चर्ख़-ए-ख़ुदा की क़सम

शाह नसीर

क्यूँ न कहें बशर को हम आतिश-ओ-आब ओ ख़ाक-ओ-बाद

शाह नसीर

कुछ सरगुज़िश्त कह न सके रू-ब-रू क़लम

शाह नसीर

ख़ाल-ए-रुख़ उस ने दिखाया न दोबारा अपना

शाह नसीर

कभू न उस रुख़-ए-रौशन पे छाइयाँ देखीं

शाह नसीर

जो रक़ीबों ने कहा तू वही बद-ज़न समझा

शाह नसीर

जिस्म उस के ग़म में ज़र्द-अज़-ना-तवानी हो गया

शाह नसीर

फ़ुर्सत एक दम की है जूँ हबाब पानी याँ

शाह नसीर

दिखा दो गर माँग अपनी शब को तो हश्र बरपा हो कहकशाँ पर

शाह नसीर

देख तू यार-ए-बादा-कश! मैं ने भी काम क्या किया

शाह नसीर

छोड़ा न तुझे ने राम क्या ये भी न हुआ वो भी न हुआ

शाह नसीर

बयाबाँ मर्ग है मजनून-ए-ख़ाक-आलूदा-तन किस का

शाह नसीर

बुझते हुए शो'लों को हुआ क्यूँ नहीं देते

शाह जी अली

काफ़िर-ए-इश्क़ हुआ जब से मैं इस दहर में हूँ

शाह आसिम

उट्ठी है जब से दिल में मिरे इश्क़ की तरंग

शाह आसिम

क़ैद-ए-दिल से है मिरी काकुल-ए-पेचाँ नाज़ाँ

शाह आसिम

दस्तियाब उस को हुआ जब से है गुल-दस्ता-ए-दाग़

शाह आसिम

बे-ख़ुदी में अजब मज़ा देखा

शाह आसिम

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.