प्रेम Poetry (page 37)

इश्क़ क्या चीज़ है ये पूछिए परवाने से

साहिर होशियारपुरी

क़ुल्ज़ुम-ए-फ़िक्र में है कश्ती-ए-ईमाँ सालिम

साहिर देहल्वी

नक़्श-ए-क़दम हैं राह में फ़रहाद-ओ-क़ैस के

साहिर देहल्वी

मिल-मिला के दोनों ने दिल को कर दिया बरबाद

साहिर देहल्वी

किताब-ए-दर्स-ए-मजनूँ मुसहफ़-रुख़्सार-ए-लैला है

साहिर देहल्वी

है सनम-ख़ाना मिरा पैमान-ए-इश्क़

साहिर देहल्वी

रुस्वा-ए-इश्क़ में तिरा शैदा कहें जिसे

साहिर देहल्वी

रुस्वा-ए-इश्क़ है तिरा शैदा कहें जिसे

साहिर देहल्वी

नूर-ए-ईमाँ सुर्मा-ए-चश्म-ए-दिल-ओ-जाँ कीजिए

साहिर देहल्वी

मस्त-ए-निगाह-ए-नाज़ का अरमाँ निकालिए

साहिर देहल्वी

कैफ़-ए-मस्ती में अजब जलवा-ए-यकताई था

साहिर देहल्वी

काम इस दुनिया में आ कर हम ने क्या अच्छा किया

साहिर देहल्वी

जुनूँ के जोश में जिस ने मोहब्बत को हुनर जाना

साहिर देहल्वी

जो ला-मज़हब हो उस को मिल्लत-ओ-मशरब से क्या मतलब

साहिर देहल्वी

जला है किस क़दर दिल ज़ौक़-ए-काविश-हा-ए-मिज़्गाँ पर

साहिर देहल्वी

गोया ज़बान हाल थी 'साहिर' ख़मोश था

साहिर देहल्वी

फ़ज़ा-ए-आलम-ए-क़ुदसी में है नश्व-ओ-नुमा मेरी

साहिर देहल्वी

दिल को यकसूई ने दी तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ की सलाह

साहिर देहल्वी

चश्म-ए-मस्त-ए-साक़ी से दिल हुआ ख़राब-आबाद

साहिर देहल्वी

अयाँ हो रंग में और मिस्ल-ए-बू गुल में निहाँ भी हो

साहिर देहल्वी

बाँध के सफ़ हों सब खड़े तेग़ के साथ सर झुके

साहिर भोपाली

अहबाब भी हैं ख़ूब कि तश्हीर कर गए

सहबा वहीद

इस तरीक़े को अदावत में रवा रखता हूँ मैं

सहबा अख़्तर

फ़र्द-ए-इसयाँ को वो सियाही दे

सहबा अख़्तर

असनाम-ए-माल-ओ-ज़र की परस्तिश सिखा गई

सहबा अख़्तर

असनाम-ए-माल-ओ-ज़र की परस्तिश सिखा गई

सहबा अख़्तर

दर्द की सूरत में वो उम्दा सा तोहफ़ा दे गया

सहर महमूद

विसाल-ओ-हिज्र से वाबस्ता तोहमतें भी गईं

सहर अंसारी

काम आई इश्क़ की दीवानगी कल रात को

सग़ीर अहमद सूफ़ी

इश्क़ क्या है ख़ुद-फ़रामोशी मुसलसल इज़्तिराब

सग़ीर अहमद सग़ीर अहसनी

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