प्रेम Poetry (page 78)

अपने दीदार की हसरत में तू मुझ को सरापा दिल कर दे

बेदम शाह वारसी

अगर काबा का रुख़ भी जानिब-ए-मय-ख़ाना हो जाए

बेदम शाह वारसी

तरहदार कहाँ से लाऊँ

बेबाक भोजपुरी

नक़्श बर-दीवार

बेबाक भोजपुरी

राज़ है इबरत-असर फ़ितरत की हर तहरीर का

बेबाक भोजपुरी

ग़म-ए-आफ़ाक़ में आरिफ़ अगर करवट बदलता है

बेबाक भोजपुरी

बड़ी दिल-शिकन है रह-ए-सफ़र कोई हम-सफ़र है न यार है

बेबाक भोजपुरी

सुब्ह क़यामत आएगी कोई न कह सका कि यूँ

बयान मेरठी

खुला है जल्वा-ए-पिन्हाँ से अज़-बस चाक वहशत का

बयान मेरठी

ख़ाक करती है ब-रंग-ए-चर्ख़-ए-नीली-फ़ाम रक़्स

बयान मेरठी

ग़म्ज़ा-ए-मा'शूक़ मुश्ताक़ों को दिखलाती है तेग़

बयान मेरठी

ये ख़ूब-रू न छुरी ने कटार रखते हैं

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

पूछता कौन है डरता है तू ऐ यार अबस

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

मैं तिरे डर से रो नहीं सकता

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

कोई किसी का कहीं आश्ना नहीं देखा

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

इश्वा है नाज़ है ग़म्ज़ा है अदा है क्या है

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

दिल अब उस दिल-शिकन के पास कहाँ

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

वारफ़्तगी-ए-इश्क़ न जाए तो क्या करें

बासित भोपाली

शौक़ को बे-अदब किया इश्क़ को हौसला दिया

बासित भोपाली

सब काएनात-ए-हुस्न का हासिल लिए हुए

बासित भोपाली

मोहब्बत की इंतिहा चाहता हूँ

बासित भोपाली

मेरे रोने पर किसी की चश्म गिर्यां हाए हाए

बासित भोपाली

कुछ सिला ही न मिला इश्क़ में जल जाने का

बासित भोपाली

जैसे भी ये दुनिया है जो कुछ भी ज़माना है

बासित भोपाली

पूछते हैं वो इश्क़ का मतलब

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया

बशीर बद्र

जल्वों का उन के दिल को तलब-गार कर दिया

बशीरुद्दीन राज़

हुई मुद्दतें ऐ दिल-ए-हज़ीं न पयाम है न सलाम है

बशीरुद्दीन राज़

इतना तो जज़्ब-ए-इश्क़ ने बारे असर किया

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

बाद-ए-फ़ना भी है मरज़-ए-इश्क़ का असर

मिर्ज़ा रज़ा बर्क़

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