जान Poetry (page 21)

किस ने कहा कि मुझ को ये दुनिया नहीं पसंद

सलीम फ़राज़

नींद से पहले

सलीम अहमद

न पूछो अक़्ल की चर्बी चढ़ी है उस की बोटी पर

सलीम अहमद

मुझ को दुश्वार हुआ जिस का नज़ारा तन्हा

सलीम अहमद

किसी दश्त का लब-ए-ख़ुश्क हूँ जो न पाए मुज़्दा-ए-आब तक

सलीम अहमद

दिल हुस्न को दान दे रहा हूँ

सलीम अहमद

तुम अगर दो न पैरहन अपना

सख़ी लख़नवी

गुफ़्तुगू हो दबी ज़बान बहुत

सख़ी लख़नवी

दुल्हन भी अगर बन के आएगी रात

सख़ी लख़नवी

हमें तो हर्फ़-ए-तमन्ना ज़बाँ पे लाना है

सज्जाद सय्यद

दुआओं में असर बाक़ी न आहों में असर बाक़ी

सज्जाद शम्सी

तिरे तग़ाफ़ुल से है शिकायत न अपने मिटने का कोई ग़म है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

सोए हुओं में ख़्वाब से बेदार कौन है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हम राज़-ए-गिरफ़्तारी-ए-दिल जान गए हैं

सज्जाद बाक़र रिज़वी

हवा में कुछ तो घुला था कि होंट नीले हुए

सज्जाद बाबर

मियाँ वो जान कतराने लगी है

साजिद प्रेमी

सर-ए-ख़याल मैं जब भूल भी गई कि मैं हूँ

साइमा असमा

कुछ बे-नाम तअल्लुक़ जिन को नाम अच्छा सा देने में

साइमा असमा

कोई इम्काँ तो न था उस का मगर चाहता था

साइमा असमा

राह आसान हो गई होगी

सैफ़ुद्दीन सैफ़

हमें ख़बर है वो मेहमान एक रात का है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

एक से एक है ग़ारत-गर-ए-ईमान यहाँ

सैफ़ुद्दीन सैफ़

दर-पर्दा जफ़ाओं को अगर जान गए हम

सैफ़ुद्दीन सैफ़

सीने की आग आतिश-ए-महशर हो जिस तरह

सैफ़ ज़ुल्फ़ी

तेरी आवाज़

साहिर लुधियानवी

नूर-जहाँ के मज़ार पर

साहिर लुधियानवी

नाकामी

साहिर लुधियानवी

लम्ह-ए-ग़नीामत

साहिर लुधियानवी

कोई दिल की चाहत से मजबूर है

साहिर लुधियानवी

एक मुलाक़ात

साहिर लुधियानवी

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