काम Poetry (page 8)

किसी के फ़ैज़-ए-क़ुर्ब से हयात अब सँवर गई

उनवान चिश्ती

कर अपनी बात कि प्यारे किसी की बात से क्या

उमर अंसारी

हो के उस कूचे से आई तो सितम ढा गई क्या

उमर अंसारी

ताइर-ए-ख़ुश-रंग को बे-बाल-ओ-पर देखेगा कौन

तुफ़ैल अहमद मदनी

बस यही इक काम बाक़ी था जो करना है मुझे

तिश्ना बरेलवी

दिन में सूरज है मिरी महरूमियों का तर्जुमाँ

तिश्ना बरेलवी

बे-तलब कर के ज़रूरत भी चली जाए अगर

तसनीम आबिदी

इतनी न कीजे जाने की जल्दी शब-ए-विसाल

मीर तस्कीन देहलवी

उस कू मैं हुए हम वो लब-ए-बाम न आया

मीर तस्कीन देहलवी

तू क्यूँ पास से उठ चला बैठे बैठे

मीर तस्कीन देहलवी

क्या क्या मज़े से रात की अहद-ए-शबाब में

मीर तस्कीन देहलवी

हुए थे भाग के पर्दे में तुम निहाँ क्यूँकर

मीर तस्कीन देहलवी

मुझे पता है बस इतना कि प्यार करना है

तरकश प्रदीप

तिरे ख़याल की लौ ही सफ़र में काम आई

तारिक़ नईम

ब-नाम-ए-इश्क़ यही एक काम करते हैं

तारिक़ नईम

अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए

तारिक़ नईम

ग़म की दीवार को मैं ज़ेर-ओ-ज़बर कर न सका

तारिक़ मतीन

है किस का इंतिज़ार खुला घर का दर भी है

तारिक़ बट

बातिल-ओ-ना-हक़ से उम्मीद-ए-करम करते रहे

तनवीर गौहर

'तनवीर' अब तू हल्क़ से भोंपू का काम ले

तनवीर सिप्रा

अदम कथा

तनवीर अंजुम

इज़्हार-ए-जुनूँ बर-सर-ए-बाज़ार हुआ है

तनवीर अंजुम

ये बात दश्त-ए-वफ़ा की नहीं चमन की है

तनवीर अहमद अल्वी

ग़म-ए-जहाँ में ग़म-ए-यार ज़म न कर पाया

तालिब हुसैन तालिब

इश्क़ क्यूँ रुस्वा हुआ अपना सर-ए-राहे गाहे

तल्हा रिज़वी बारक़

मिरी तवज्जोह फ़क़त मिरे काम पर रहेगी

तैमूर हसन

नहीं उड़ाऊँगा ख़ाक रोया नहीं करूँगा

तैमूर हसन

मिरा बातिन मुझे हर पल नई दुनिया दिखाता है

तैमूर हसन

बहाऊँगा न मैं आँसू न मुस्कराउँगा

तैमूर हसन

इसे मैं और ये मेरा असा ही तय करेगा

तहसीन फ़िराक़ी

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