काम Poetry (page 9)

काग़ज़ पे तेरा नक़्श उतारा नहीं गया

ताहिरा जबीन तारा

ग़म इस का कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया

ताहिर फ़राज़

अब के बरस होंटों से मेरे तिश्ना-लबी भी ख़त्म हुइ

ताहिर फ़राज़

जहान-ए-दिल में सन्नाटा बहुत है

ताबिश मेहदी

तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ

ताबिश कानपुरी

क़ुसूर इश्क़ में ज़ाहिर है सब हमारा था

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

गुलों के साथ अजल के पयाम भी आए

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

ईमान ओ दीं से 'ताबाँ' कुछ काम नहीं है हम को

ताबाँ अब्दुल हई

साक़ी हो और चमन हो मीना हो और हम हों

ताबाँ अब्दुल हई

न मिरे पास इज़्ज़त-ए-रमज़ाँ

ताबाँ अब्दुल हई

मुझे ऐश ओ इशरत की क़ुदरत नहीं है

ताबाँ अब्दुल हई

किसी का काम दिल इस चर्ख़ से हुआ भी है

ताबाँ अब्दुल हई

खोता ही नहीं है हवस-ए-मतअम-ओ-मलबस

ताबाँ अब्दुल हई

काबा है अगर शैख़ का मस्जूद-ए-ख़लाइक़

ताबाँ अब्दुल हई

इन ज़ालिमों को जौर सिवा काम ही नहीं

ताबाँ अब्दुल हई

ग़म में रोता हूँ तिरे सुब्ह कहीं शाम कहीं

ताबाँ अब्दुल हई

उन्स है ख़ाना-ए-सय्याद से गुलशन कैसा

तअशशुक़ लखनवी

क्या देखता है हाल के मंज़र इधर भी देख

सय्यदा शान-ए-मेराज

पुरानी मोटर

सय्यद ज़मीर जाफ़री

मेरी बीवी क़ब्र में लेटी है जिस हंगाम से

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपनी ख़बर नहीं है ब-जुज़ इस क़दर मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपनी ख़बर नहीं है ब-जुज़ ईं क़दर मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

क्या मेरे काम से है रवाई को दुश्मनी

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

वही गुल है गुलिस्ताँ में वही है शम्अ' महफ़िल में

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

तुम्हारे आने का जब जब भी एहतिमाम किया

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

जश्न बरबाद ख़यालों का मना लूँ तो चलूँ

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

ब-हर-सूरत मोहब्बत का यही अंजाम देखा है

सय्यद मोहम्मद ज़फ़र अशक संभली

यकुम मई

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

तर्ज़-ए-नौ की शाएरी

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

मुशाएरा

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

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