सपना Poetry (page 73)

अब के बरस भी महका महका ख़्वाब दरीचा लगता है

बुशरा ज़ैदी

जो न कट सका वो निशान था किसी ज़ख़्म का

बुशरा हाश्मी

सर-ए-दश्त दिल जो सराब था कोई ख़्वाब था

बुशरा हाश्मी

उन्हें ढूँडो

बुशरा एजाज़

मेरे ख़ामोश ख़ुदा

बुशरा एजाज़

मिरी रात मेरा चराग़ मेरी किताब दे

बुशरा एजाज़

ख़ामुशी में क़यास मेरा है

बबल्स होरा सबा

सुलगती रेत में इक चेहरा आब सा चमका

बृजेश अम्बर

हैराँ हूँ कि अब लाऊँ कहाँ से मैं ज़बाँ और

बिस्मिल साबरी

मोहब्बत नग़्मा भी है साज़ भी है

बिर्ज लाल रअना

ख़याल को ज़ौ नज़र को ताबिश नफ़स को रख़शंदगी मिलेगी

बिर्ज लाल रअना

जिस की हर बात में क़हक़हा जज़्ब था मैं न था दोस्तो

बिमल कृष्ण अश्क

नहीं है ख़्वाब दीवाने का हस्ती

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

नज़र आता है वो जैसा नहीं है

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

मिरी हथेली में लिक्खा हुआ दिखाई दे

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

हमारी जागती आँखों में ख़्वाब सा क्या था

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

अपनी तो कोई बात बनाए नहीं बनी

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

उलझ रहा था अभी ख़्वाब की फ़सील से मैं

बिलाल अहमद

सोते में मुस्कुराते बच्चे को देख कर

बिलाल अहमद

मुश्किल

बिलाल अहमद

अजल की फूँक मिरे कान में सुनाई दी

बिलाल अहमद

सब ने होंटों से लगा कर तोड़ डाला है मुझे

भारत भूषण पन्त

फिर वो बे-सम्त उड़ानों की कहानी सुन कर

भारत भूषण पन्त

हर एक रात में अपना हिसाब कर के मुझे

भारत भूषण पन्त

चाहतों के ख़्वाब की ताबीर थी बिल्कुल अलग

भारत भूषण पन्त

आब की तासीर में हूँ प्यास की शिद्दत में हूँ

भारत भूषण पन्त

सब्र आता है जुदाई में न ख़्वाब आता है

बेख़ुद देहलवी

हुआ जो वक़्फ़-ए-ग़म वो दिल किसी का हो नहीं सकता

बेख़ुद देहलवी

हिजाब दूर तुम्हारा शबाब कर देगा

बेख़ुद देहलवी

बनी थी दिल पे कुछ ऐसी की इज़्तिराब न था

बेख़ुद देहलवी

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