खुशबू Poetry (page 9)

दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ

शकील जमाली

जब क़ाफ़िला यादों का गुज़रा तो फ़ज़ा महकी

शकील ग्वालिआरी

तुझ को सोचों तो तिरे जिस्म की ख़ुशबू आए

शकील आज़मी

बात से बात की गहराई चली जाती है

शकील आज़मी

अब इस से मिलने की उम्मीद क्या गुमाँ भी नहीं

शकील आज़मी

ग़म-ए-उल्फ़त मिरे चेहरे से अयाँ क्यूँ न हुआ

शकेब जलाली

लगा लिया था गले उस ने बा-वफ़ा कह कर

शकेब अयाज़

रख़्त-ए-सफ़र

शाइस्ता मुफ़्ती

रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी

शहज़ाद क़ैस

कोेसा दूध

शहज़ाद हसन

रात के वक़्त कोई गीत सुनाती है हवा

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

मर जाने की उस दिल में तमन्ना भी नहीं है

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

वो कौन है उसे सूरज कहूँ कि रंग कहूँ

शहज़ाद अहमद

नींद आए तो अचानक तिरी आहट सुन लूँ

शहज़ाद अहमद

अपने लिए तो ख़ाक की ख़ुश्बू है ज़िंदगी

शहज़ाद अहमद

आज तक उस की मोहब्बत का नशा तारी है

शहज़ाद अहमद

गामज़न

शहज़ाद अहमद

एक दरख़्त

शहज़ाद अहमद

आँख-मिचोली

शहज़ाद अहमद

ये भी सच है कि नहीं है कोई रिश्ता तुझ से

शहज़ाद अहमद

तुझ पे जाँ देने को तय्यार कोई तो होगा

शहज़ाद अहमद

तिरी तलाश तो क्या तेरी आस भी न रहे

शहज़ाद अहमद

तेरे घर की भी वही दीवार थी दरवाज़ा था

शहज़ाद अहमद

रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया

शहज़ाद अहमद

मुंतज़िर दश्त-ए-दिल-ओ-जाँ है कि आहू आए

शहज़ाद अहमद

मैं अकेला हूँ यहाँ मेरे सिवा कोई नहीं

शहज़ाद अहमद

फ़स्ल-ए-गुल ख़ाक हुई जब तो सदा दी तू ने

शहज़ाद अहमद

अब निभानी ही पड़ेगी दोस्ती जैसी भी है

शहज़ाद अहमद

आज तक उस की मोहब्बत का नशा तारी है

शहज़ाद अहमद

ख़लीलुर्रहमान आज़मी की याद में

शहरयार

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