नज़र Poetry (page 12)

मिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारो

वसीम बरेलवी

मिरी वफ़ाओं का नश्शा उतारने वाला

वसीम बरेलवी

मैं अपने ख़्वाब से बिछड़ा नज़र नहीं आता

वसीम बरेलवी

कितना दुश्वार था दुनिया ये हुनर आना भी

वसीम बरेलवी

हम अपने आप को इक मसअला बना न सके

वसीम बरेलवी

हमारा अज़्म-ए-सफ़र कब किधर का हो जाए

वसीम बरेलवी

चाँद का ख़्वाब उजालों की नज़र लगता है

वसीम बरेलवी

अपने साए को इतना समझाने दे

वसीम बरेलवी

अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा

वसीम बरेलवी

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे

वसीम बरेलवी

तिरी नज़र से दिलों के चराग़ जल उठ्ठे

वाक़िफ़ राय बरेलवी

खेल मौजों का ख़तरनाक सही क्या मैं इस खेल से डर जाऊँगा

वाक़िफ़ राय बरेलवी

तिरी नज़र में तिरे मा-सिवा नहीं होगा

वक़ार वासिक़ी

ख़ुश-नज़र कह के टाल दे मुझ को

वक़ार वासिक़ी

ग़ैर-मुमकिन था ये इक काम मगर हम ने किया

वक़ार वासिक़ी

सलीक़ा बोलने का हो तो बोलो

वक़ार मानवी

मिरे वजूद को पामाल करना चाहता है

वक़ार मानवी

ज़ियादा सोचने वाले तुझे पता नहीं है

वक़ार ख़ान

इक-बटा-दो को करूँ क्यूँ न रक़म दो-बटा-चार

वक़ार हिल्म सय्यद नगलवी

मौसम को भी 'वक़ार' बदल जाना चाहिए

वक़ार फ़ातमी

तुम ख़फ़ा क्या हुए हयात गई

वक़ार बिजनोरी

ग़म-ए-मोहब्बत है कार-फ़रमा दुआ से पहले असर से पहले

वक़ार बिजनोरी

चश्म-ए-यक़ीं से देखिए जल्वा-गह-ए-सिफ़ात में

वक़ार बिजनोरी

मुझे उस जुनूँ की है जुस्तुजू जो चमन को बख़्श दे रंग ओ बू

वामिक़ जौनपुरी

इस दौर की तख़्लीक़ भी क्या शीशागरी है

वामिक़ जौनपुरी

इक हल्क़ा-ए-अहबाब है तन्हाई भी उस की

वामिक़ जौनपुरी

ऐ काश मिरे गोश ओ नज़र भी रहें साबित

वामिक़ जौनपुरी

अगर ग़ुबार हो दिल में अगर हो तंग-नज़र

वामिक़ जौनपुरी

ज़मीर

वामिक़ जौनपुरी

देहली

वामिक़ जौनपुरी

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