नज़र Poetry (page 14)
आरज़ू ले के कोई घर से निकलते क्यूँ हो
वाली आसी
जहालत का मंज़र जो राहों में था
वकील अख़्तर
दर-ओ-दीवार पे हसरत से नज़र करते हैं
वाजिद अली शाह अख़्तर
सुन रक्खो उसे दिल का लगाना नहीं अच्छा
वाजिद अली शाह अख़्तर
बरबाद न कर उस को ज़रा हाथ पे धर ला
वाजिद अली शाह अख़्तर
तुम्हारा मुद्दआ ही जब समझ में कुछ नहीं आया
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
वफ़ा-ए-दोस्ताँ कैसी जफ़ा-ए-दुश्मनाँ कैसी
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
तीर-ए-नज़र ने ज़ुल्म को एहसाँ बना दिया
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
शौक़ ने इशरत का सामाँ कर दिया
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
संग-ए-तिफ़्लाँ फ़िदा-ए-सर न हुआ
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
पोशीदा देखती है किसी की नज़र मुझे
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
मैं ने माना काम है नाला दिल-ए-नाशाद का
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
क्या है कि आज चलते हो कतरा के राह से
वहशत रज़ा अली कलकत्वी
ज़िंदगी
वहीदुद्दीन सलीम
हुस्न की ज़बान से
वहीदुद्दीन सलीम
आरियों की पहली आमद हिन्दोस्तान में
वहीदुद्दीन सलीम
शिद्दत-ए-शौक़ असर-ख़ेज़ है जादू की तरह
वाहिद प्रेमी
सितम है दिल के धड़कने को भी क़रार कहें
वहीदा नसीम
रौशन हों दिल के दाग़ तो लब पर फ़ुग़ाँ कहाँ
वहीदा नसीम
जिधर निगाह उठी खिंच गई नई दीवार
वहीद क़ुरैशी
हमेशा ख़ून-ए-शहीदाँ के रंग से आबाद
वहीद क़ुरैशी
तुझ में तो एक ख़ू-ए-जफ़ा और हो गई
वहीद इलाहाबादी
आइए जल्वा-ए-दीदार के दिखलाने को
वहीद इलाहाबादी
दीमक
वहीद अख़्तर
ख़ुश्बू है कभी गुल है कभी शम्अ कभी है
वहीद अख़्तर
हम को मंज़ूर तुम्हारा जो न पर्दा होता
वहीद अख़्तर
हम जो टूटे तो ग़म-ए-दहर का पैमाना बने
वहीद अख़्तर
इक दश्त-ए-बे-अमाँ का सफ़र है चले-चलो
वहीद अख़्तर
आँख जो नम हो वही दीदा-ए-तर मेरा है
वहीद अख़्तर
तन्हाई मुझे देखती है
वहीद अहमद
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