नज़र Poetry (page 13)

अलिफ़ लैला

वामिक़ जौनपुरी

ज़हराब पीने वाले अमर हो के रह गए

वामिक़ जौनपुरी

क़िर्तास पे नक़्शे हमें क्या क्या नज़र आए

वामिक़ जौनपुरी

मिरे फ़िक्र ओ फ़न को नई फ़ज़ा नए बाल-ओ-पर की तलाश है

वामिक़ जौनपुरी

इस तरह से कश्ती भी कोई पार लगे है

वामिक़ जौनपुरी

हुज़ूर-ए-यार भी आज़ुर्दगी नहीं जाती

वामिक़ जौनपुरी

बर्क़ सर-ए-शाख़-सार देखिए कब तक रहे

वामिक़ जौनपुरी

क्या कहूँ कि क्या हूँ मैं

वलीउल्लाह वली

कोई अपने वास्ते महशर उठा कर ले गया

वलीउल्लाह वली

कभी जब दास्तान-ए-गर्दिश-ए-अय्याम लिखता हूँ

वलीउल्लाह वली

रात आख़िर है यहाँ आया नज़र आसार-ए-सुब्ह

वलीउल्लाह मुहिब

इन दो के सिवा कोई फ़लक से न हुआ पार

वलीउल्लाह मुहिब

है मिरे पहलू में और मुझ को नज़र आता नहीं

वलीउल्लाह मुहिब

अश्क-बारी से ग़म-ओ-दर्द की खेती-बाड़ी

वलीउल्लाह मुहिब

यूँ घर से मोहब्बत के क्या भाग चले जाना

वलीउल्लाह मुहिब

पहले सफ़-ए-उश्शाक़ में मेरा ही लहू चाट

वलीउल्लाह मुहिब

मिरे दिल में हिज्र के बाब हैं तुझे अब तलक वही नाज़ है

वलीउल्लाह मुहिब

मय-ए-गुल-गूँ के जो शीशे में परी रहती है

वलीउल्लाह मुहिब

लाला-रू तुम ग़ैर के पाले पड़े

वलीउल्लाह मुहिब

ख़ाना-ए-दिल का जो तवाइफ़ है

वलीउल्लाह मुहिब

है मिरे पहलू में और मुझ को नज़र आता नहीं

वलीउल्लाह मुहिब

दिल-ए-ख़िल्क़त-ए-ख़ुदा को सनमा जला न चंदाँ

वलीउल्लाह मुहिब

आना है तो आ जाओ यक आन मिरा साहब

वलीउल्लाह मुहिब

जिस पर नज़र पड़े उसे ख़ुद से निकालना

वली उज़लत

तुझ से बोसा मैं न माँगा कभू डरते डरते

वली उज़लत

तिरे लब-बिन है दिल में शोला-ज़न मुल जिस को कहते हैं

वली उज़लत

तिरी नज़र का तीर जब जिगर के पार हो गया

वली शम्सी

तिरा लब देख हैवाँ याद आवे

वली मोहम्मद वली

दिल हुआ है मिरा ख़राब-ए-सुख़न

वली मोहम्मद वली

आशिक़ के मुख पे नैन के पानी को देख तूँ

वली मोहम्मद वली

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